देहरादून, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा 25 एवं 26 अक्टूबर 2026 को विज्ञान धाम, यूकॉस्ट, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का आयोजन किया गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन ने वैज्ञानिक आदान-प्रदान, अंतर्विषयी सहयोग, शोध प्रस्तुतियों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, नीतिगत विषयों, आपदा सहनशीलता और क्षेत्रीय विकास से संबंधित विषयों पर कुल आठ विचार-मंथन सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के प्रमुख विषयों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से हिमालयी आपदा सहनशीलता को सुदृढ़ करना; साइबर-भौतिक प्रणालियाँ, STEM एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता; रक्षा क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वर्तमान स्थिति, उभरते रुझान एवं भविष्य की संभावनाएँ; विज्ञान एवं आध्यात्मिकता—वैज्ञानिक अन्वेषण, चेतना और मानव कल्याण के अंतर्संबंधों की पड़ताल; STI नीति 2026 के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अवसरों को सामने लाने में विज्ञान संचार एवं मीडिया की भूमिका; STEM में महिलाएँ—विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार में महिलाओं की भूमिका; उत्तराखंड में अनुसंधान एवं विकास (R&D) का परिदृश्य; तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ एवं नैतिकता और हिमालय के सतत विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका, विशेष रूप से उत्तराखंड पर केंद्रित विषय शामिल रहे।
इन विचार-मंथन सत्रों का उद्देश्य नीतिगत संवाद को प्रोत्साहित करना, वैज्ञानिक संस्थानों एवं सरकारी हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा क्षेत्रीय विकास, आपदा सहनशीलता, तकनीकी उन्नति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण तलाशना था। सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तराखंड की पूर्व मुख्य सचिव एवं मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. सतपाल सिंह बिष्ट ने की। उत्तराखंड के पूर्व डीआईजी श्री अनिल रतूड़ी सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विज्ञान भारती के अध्यक्ष श्री केडी पुरोहित तथा जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE), अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. आईडी भट्ट भी सत्र में अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन ने अनुसंधान, शिक्षा, शासन, उद्योग, मीडिया और नवाचार से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तकनीकी प्रस्तुतियों, विषयगत विचार-विमर्श, संवादात्मक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से सम्मेलन ने वैज्ञानिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया, अंतर्विषयी सहयोग को बढ़ावा दिया तथा वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित करने की संभावनाओं को रेखांकित किया। सम्मेलन में युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने, विज्ञान और नीति-निर्माण के बीच समन्वय मजबूत करने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया गया। विचार-विमर्श के दौरान उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित किया गया।
साथ ही, आपदा सहनशीलता, हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास, तकनीकी प्रगति तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण को महत्वपूर्ण विषयों के रूप में सामने रखा गया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों के दौरान कुल 261 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें 189 मौखिक प्रस्तुतियाँ तथा 72 पोस्टर प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। समापन सत्र के दौरान तकनीकी सत्रों के विजेताओं को उनके शोध कार्यों एवं प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया।




