दूरदृष्टि, संघर्ष व विद्वता से उपजा विचार “कुंभ हमारा भाग्य, सनातनियों का सौभाग्य”
‘धर्मनगरी को पॉलीथीन और प्लास्टिक मुक्त रखने का लिया संकल्प’
देहरादून, अगले वर्ष 2027 के जनवरी माह में हरिद्वार की पावन धरती पर अर्धकुंभ आयोजित होने जा रहा है आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का विराट संगम अर्धकुंभ जिसमें लगभग 15 से 20 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। ऐसे महापर्व में जहाँ आस्था का समुद्र उमड़ेगा, वहीं स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण भी एक बड़ी चुनौती होगी।
इसी सोच के साथ धर्मनगरी को पॉलीथीन और प्लास्टिक मुक्त रखने का संकल्प लिया है कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने, और इस संकल्प का सबसे सुंदर समाधान निकला है।
जिसके तहत “मिट्टी से सँवरना, मिट्टी हो जाना…” के सार्थक परिरूप में अब आस्था के इस महाकुंभ में मिट्टी की खुशबू फिर से अपनी पहचान बनाएगी।
कुम्हारों के चाक को मिलेगी रफ्तार, मिट्टी के कुल्हड़, प्लेट और पारंपरिक बर्तन होंगे तैयार,
और सनातन संस्कृति का स्वरूप और भी दिव्य दिखाई देगा।
प्रदेश सरकार के लघु उद्योग विभाग द्वारा देहरादून व धर्मनगरी के कुम्हारों को 50% सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी, बैंकों के माध्यम से ऋण दिया जाएगा, साथ ही मिट्टी उठान की सरकारी अनुमति भी प्रदान की जाएगी।
जब कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी देहरादून की संकरी और अनजान गलियों में बसे कुम्हार परिवारों तक पहुँचे, तो वर्षों से संघर्ष कर रहे चेहरों पर उम्मीद और मुस्कान साफ दिखाई दी।
यह केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि मिट्टी की सौंधी खुशबू, श्रम और परंपरा के सम्मान का भाव है। “कुम्हार समाज के लिए यह सिर्फ़ सहायता नहीं, बल्कि उनकी कला, मेहनत और अस्तित्व को मिला सम्मान है।”



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