Wednesday, April 17, 2024
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कृषि कानूनों के खिलाफ : दिल्ली की ओर किसानों का कूच, प्रशासन ने सड़कें खोदीं,, पढ़ें पूरा अपडेट

चंडीगढ़, केन्द्र सरकार द्वारा लागू कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के किसानों ने दिल्ली कूच किया है। दिल्ली से पहले हरियाणा में किसानों को भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। एक ओर किसान जहां दिल्ली प्रवेश की जिद पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन उन्हें रोकने की हर कोशिश कर रहा है।

इन सबके बीच हरियाणा के सभी प्रमुख मार्गों पर भारी जाम की स्थिति है, हरियाणा के फतेहाबाद के टोहाना में किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने जेसीबी से रोड को गहरा खोदना शुरू कर दिया है। दरअसल, टोहाना क्षेत्र में पंजाब के किसान भारी संख्या में जुट गए हैं। ये सभी किसान दिल्ली जाने पर अड़े हुए हैं। प्रशासन उन्हें रोकने के लिए अब सड़क खोदना शुरू कर दिया है, फतेहाबाद में भारी पुलिस बल पंजाब सीमा पर तैनात है। किसी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। गुजरात, राजस्थान व अन्य राज्योंं से पंजाब के जीरकपुर और चंडीगढ़ जाने वाली करीब 200 गाड़ियांं टोहाना में फंस गई हैं, क्योंकि चंडीगढ़ रोड पर किसानों ने धरना दिया हुआ है।

गौरतलब हो कि कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में पिछले डेढ़ माह से किसानों का आंदोलन चल रहा था। अब किसान दिल्ली को इस आंदोलन का केंद्र बनाना चाह रहे हैं। तभी किसानों ने दिल्ली चलो आंदोलन का आह्वान किया। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से निकले किसानों के काफिले में रसद और ठंड से बचने की पूरी व्यवस्था है। किसानों का कहना है कि जब तक ये कृषि कानून वापस नहीं होंगे, तब तक वे दिल्ली में डटे रहेंगे, पंजाब के फाजिल्का से करीब 300 किसानों का जत्था दिल्ली रवाना होने को तैयार है। इसमें अबोहर, बल्लूआना, फाजिल्का और जलालाबाद के किसान शामिल हैं।

भाकियू कादियां के फाजिल्का ब्लॉक प्रधान बूटा सिंह ने बताया कि करीब 30 ट्रालियों में सवार होकर 300 किसान दिल्ली जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रालियों में छह महीने का राशन, लकड़ी और गैस सिलिंडर, जरूरी दवाएं, टेंट और तिरपाल का प्रबंध है। किसानों को पुलिस ने जहां भी रोका, वहीं चक्का जाम शुरू हो गया, लुधियाना से भी किसान यूनियन ने बुधवार को ही दिल्ली कूच की तैयारी की। जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला, लुधियाना समेत अन्य शहरों से एक हजार ट्रैक्टर-ट्रालियां लाडोवाल टोल प्लाजा से दिल्ली की तरफ जा रही हैं। सौ-सौ ट्रैक्टर ट्रालियों के जत्थे बनाकर किसान नेता आगे बढ़ रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि अब चाहे एक माह तक दिल्ली में धरना क्यों न देना पड़े, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।

हाईकोर्ट हुआ सख्त, किसानों की गिरफ्तारी पर हरियाणा सरकार से मांगा जवाब

राजधानी दिल्ली में 26 नवंबर को प्रस्तावित किसानों के आंदोलन से पहले हरियाणा में किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले में हरियाणा भर में हुई किसानों की गिरफ्तारियों को लेकर ‘हरियाणा प्रोग्रेसिव फार्मर यूनियन’ द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा डीजीपी व हरियाणा सरकार को तुरंत वीरवार (26 नवम्बर) तक गिरफ्तारियों के बारे में हाई कोर्ट के सामने रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए किसान यूनियन ने अपने वकील प्रदीप रापडिय़ा व एचपीएस इस्सर के माध्यम से 25 नवम्बर को दायर की गई। याचिका की सुनवाई उसी दिन बुधवार को ही सुनवाई की गुहार लगाई। 26-27 नवंबर को दिल्‍ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए किसानों के कूच को रोकने के लिए हरियाणा सरकार सोमवार रात से ही किसान नेताओं की धर-पकड़ पर उतर आई।

याचिका में किसानों ने आरोप लगाया कि नए कृषि कानून के विरोध कर रहे किसान खेत मजदूर नेताओं को आधी रात को ही राज्य के अलग-अलग जगहों से बड़े पैमाने पर बिना किसी अपराधिक घटना में संलिप्त किसानों के घरों पर छापेमारी की गई और 100 से अधिक नेताओं की बिना कोई कारण बताए गिरफ्तारियां की गई।

सरकार ने किसानों को दिल्‍ली पहुंचने से रोकने के लिए अपने पूरे तंत्र को लगा दिया है। किसानों की तरफ से पेश हुए वकील प्रदीप रापडिय़ा ने बताया कि ऐसे में किसानों के घरों पर आधी रात को दबिश देना व उनके साथ खतरनाक अपराधियों की व्यवहार करना असंवैधानिक व लोकतंत्र की हत्या करना है और किसानों की तुरंत रिहाई की गुहार लगाई। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए डीजीपी हरियाणा से वीरवार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।

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