Saturday, August 1, 2026
HomeStatesUttarakhandउत्तराखंड: "25 साल बाद भी आपदा प्रबंधन सफेद हाथी", मानसून की पहली...

उत्तराखंड: “25 साल बाद भी आपदा प्रबंधन सफेद हाथी”, मानसून की पहली बारिश में खुली सरकार के दावों की पोल – काशी सिंह ऐरी

देहरादून – सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह फेल, मानसून को लेकर सरकार ने नहीं की कोई तैयारी आलम यह है कि मानसून आते ही प्रदेश वासियों का आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। यह कहना है उक्रांद के सर्वोच्च नेता व पूर्व अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी का।
उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य बनने के 25 वर्षों बाद भी उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन तंत्र सफेद हांथी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारों की प्रार्थमिकता आपदा से निपटने के लिये ठोस कार्ययोजना बनाने की बजाय आपदा प्रबंधन के नाम पर धन को ठिकाने लगाने की रही है, स्थिति यह है कि मानसून में थोड़ा सी भी वारिस आम जनता के लिये मुसीबत बन जाती है।
उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के सर्वोच्च नेता काशी सिंह ऐरी ने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखण्ड में आपदाओं से निपटने के लिये आज तक सरकारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वर्तमान प्रदेश सरकार आपदा से निपटने के लिये कहीं भी संवेदनशील नहीं दिख रही, एक ही वारिस ने सरकार के आपदा प्रबंधन की तैयारियों व घटिया विकास कार्यों की की पोल खोलकर रख दी है।
उन्होंने कहा कि नंदा की चौकी में हाल ही में पुनर्निमित पुल का एप्रोच धंसना घटिया निर्माण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में जहां तहां सड़के बाधित है, यात्री जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले मोटर मार्ग कई दिनों से बाधित चल रहे हैं। अकेले पिथौड़ा गढ़ में जनपद में दर्जन भर से अधिक मोटर मार्ग बाधित है। जबकि पूरे प्रदेश में 100 से अधिक मोटर मार्ग बाधित है। भू-धंसाव व भूस्खलन से कई गांवं व परिवार खतरे की जद में हैं, चारधाम यात्रा ब्यवस्था भी लगातार सड़क व पैदल मार्ग बाधित होने से प्रभावित हो रही है। उचित तैयारी न होने के कारण यात्रियों को परेशानियां उठानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मानसून को लेकर सरकारें आज तक ठोस आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित नहीं कर पाई। सरकारी तंत्र आपदा आने पर सक्रियता दिखाता है और आपदा के बाद चैन की नींद सो जाता है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments