देहरादून, उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा बाल भवन में हरेला पखवाड़े के तत्वाधान में अमर बलिदानी शहीद श्रीदेव सुमन की पुण्य तिथि पर उनको याद करते हुए परिसर में वृक्षारोपण किया गया। शहीद श्रीदेव सुमन के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुये परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. एस. फारुख ने कहा आज की भाग दौड़ भरी जिन्दगी में वृक्षों को लगाने हेतु जन जागरण की आवश्यकता है ताकि हमारा पर्यावरण सुरक्षित रह सके। परिषद के उपाध्यक्ष मोहन सिंह खत्री ने कहा कि एक वृक्ष लगाना आज समय की मांग है ताकि प्रदूषित होते हुये वातावरण को शुद्ध आक्सीजन प्राप्त हो सके।
कार्यक्रम में महासचिव आशारानी पैन्यूली ने कहा कि जिस तरह से देश में पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है, उसको सुरक्षित रखने के लिये अधिक से अधिक वृक्षों लगाया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम से पूर्व बाल भवन पहुंचे वक्ताओं ने श्रीदेव सुमन के बलिदान को याद करते हुए उनके जीवन की यादों को ताजा किया और कहा आज हर व्यक्ति को श्रीदेव सुमन के कृतत्व से ज्ञान लेना चाहिए ताकि एक सार्थक समाज की परिकल्पना की जा सके। इस अवसर पूर्व महासचिव वी. के. डोभाल के द्वारा पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुशील कुमार डोभाल जी द्वारा बाल भवन को भेजा गया संदेश वाचन किया गया।
इस अवसर पर बाल भवन परिसर में जड़ी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर मण्डल की शाखा भानियावाला के सौजन्य से प्रदत्त तथा परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. एस. फारुख एवं अन्य सदस्यों के द्वारा दिये गये हरड़, बहेड़ा, अर्जुन, आंवला, पुत्रजीवा, हरसिंघार, अमलतास, रीठा, शतावर, पीपली, सर्पगन्धा, लैमनग्रास, आम, जामुन, बांज, टिमरु, काफल, दहिमन, वरुणा, गिलाई, कचनार, अमरुद, चकोतरा इत्यादि औषधीय एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया। परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती पुष्पा मानस के द्वारा भी बाल भवन परिसर में कई प्रजाति के फूलदार पौधों का रोपण किया गया। परिषद के उपाध्यक्ष मोहन सिंह खत्री के द्वारा परिषद के आजीवन सदस्य स्व० दिगम्बर सिंह पंवार की पुण्य स्मृति में बाल भवन में पौध रोपण किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती किरन खण्डूड़ी के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर आशारानी पैन्यूली, मोहन खत्री, ज्योत्सना खत्री, केपी भट्ट, एल मोहन लखेड़ा, रमेश खत्री, आशा श्रीवास्तव, डा. अरुण श्रीवास्तव, कुसुमलता कोठारी, विजय लक्ष्मी रावत, कविता दत्ता, राजेन्द्र सिंह रावत, योगम्बरसिंह रावत, अनुराज सिंह रावत, किरण खण्डूड़ी इत्यादि मौजूद रहे।


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