Saturday, April 18, 2026
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देहरादून में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस

देहरादून । श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं भीड़ जुटती है। देवकीनंदन जी देशभर में एक प्रख्यात नाम है, जो सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और सोशल मीडिया पर इनके लाखों की संख्या में फॉलोअर्स हैं. देहरादून के पवित्र टपकेश्वर महादेव मंदिर की कथा महाभारत काल से जुड़ी है। यहां गुरु द्रोणाचार्य तपस्या करते थे। एक बार उनके पुत्र अश्वत्थामा को भूख लगी और दूध न होने पर द्रोणाचार्य जी ने भगवान भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव प्रसन्न होकर गुफा की छत से जल टपकाने लगे, जो दूध के समान पवित्र था और अश्वत्थामा की भूख शांत हुई। यह कथा हमें सिखाती है कि जब भक्ति सच्ची होती है, तो भगवान स्वयं अपने भक्त की सहायता करते हैं। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, भगवान अपने भक्त को कभी अकेला नहीं छोड़ते।

भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान ने हिरण्यकशिपु का वध किया , यह कथा हमें यह सिखाती है कि सच्ची और निस्वार्थ भक्ति में अपार शक्ति होती है। जब भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, हमें अपनी भक्ति और विश्वास को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि भगवान हमेशा अपने सच्चे भक्त के साथ रहते हैं।

कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव धूम-धाम से मनाया गया। सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा और ऐसा प्रतीत होने लगा मानो देहरादून स्वयं वृंदावन की पावन भूमि में परिवर्तित हो गया हो। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अद्भुत झांकी निकाली गई, जिसमें भक्तगण बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्मिलित हुए। चारों ओर गूंजते मधुर कृष्ण भजनों ने वातावरण को अलौकिक आभा से आलोकित कर दिया। भक्तों की भावनाओं और उमंगों से पूरा परिसर प्रेम, भक्ति और आनंद के दिव्य रंगों में रंग उठा।

बच्चों को बचपन से ही धार्मिक संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही संस्कार उनके पूरे जीवन की दिशा तय करते हैं। जब हम बच्चों को छोटी उम्र से ही “राधे-राधे” बोलना, माथे पर तिलक लगाना, सुबह उठकर भगवान का नाम लेना सिखाते हैं, तो उनके भीतर श्रद्धा, विनम्रता और सकारात्मक सोच का विकास होता है। ये छोटे-छोटे अभ्यास बच्चों के मन को शुद्ध करते हैं और उन्हें जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

एकादशी का व्रत सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। प्रत्येक महीने में आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, और इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है, मन शुद्ध होता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।

मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण उसका अभिमान है। जब व्यक्ति अपने ज्ञान, धन, पद या रूप का घमंड करता है, तो वही अभिमान उसे धीरे-धीरे पतन की ओर ले जाता है। इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने अभिमान किया, वे भगवान की कृपा से वंचित रह गए। मनुष्य को जीवन में वही काम करना चाहिए जिससे लोगो का कल्याण होता है। मानव कल्याण ही जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। यह वही राह है जिस पर चलकर मनुष्य का उद्धार हो सकता है। अत: स्वयं को पहचानें और अपना जीवन दूसरों की भलाई में लगाकर सत्कर्म के भागीदार बनें।

जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार धारण कर धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए अवतरित होते हैं। जब भी अधर्मी शक्तियाँ समाज में हावी होती हैं, तब भगवान स्वयं या उनके द्वारा भेजे गए दिव्य पुरुष धरती पर आकर सत्य और धर्म की पुनः स्थापना करते हैं।

श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन का संचालन एवं व्यवस्थापन सीमा शर्मा सुनील शर्मा संदीप रस्तोगी एवं शिल्प रास्तों के द्वारा किया जा रहा है उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में तथा में लोग पहुंच रहे हैं यहां पर प्रांत प्रचारक शैलेंद्र सिंह भी पहुंचे

 

 

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