देहरादून (एल मोहन लखेड़ा), उत्तराखंड़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन जब राज्य खेल विभाग इन प्रतिभाओं को लेकर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाये तो कैसे पर्वतीय भूभाग के युवा होनहार खिलाड़ी कैसे आगे बढ़ पायेंगे यह प्रश्न मुंहबायें खड़ा है, मामला टेबल टेनिस खेल से जुड़ा है, पर्वतीय जनपद के चमोली उर्गम ज्योतिर्मठ निवासी उभरते टेबल टेनिस खिलाड़ी शार्दुल नेगी के परिजनों ने खेल विभाग के अधिकारियों और संघ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और खेल सचिव से हस्तक्षेप की मांग की है। शार्दुल की माता शांति देवी द्वारा 4 फरवरी 2026 को प्रेषित शिकायत के अनुसार, चमोली की ओर से खेलते हुए राज्य स्वर्ण पदक जीतने वाले शार्दुल को अगस्त 2025 में हरिद्वार में आयोजित एक प्रतियोगिता के दौरान उनके ‘पहाड़ी’ और ‘ग्रामीण’ मूल का होने के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा।
आरोप है कि वहां जिला क्रीड़ा अधिकारी और टेबल टेनिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने न केवल गलत अंपायरिंग के जरिए खिलाड़ी का मनोबल तोड़ा, बल्कि विरोध करने पर शार्दुल और उनके कोच विजय कुमार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी दी। इस उत्पीड़न के चलते जोशीमठ में संचालित सरकारी टीटी प्रशिक्षण केंद्र भी बंद हो गया है, जिससे एक होनहार खिलाड़ी का भविष्य अंधकार में है।
वहीं परिजनों ने दोषियों पर कार्रवाई करने और प्रशिक्षण केंद्र को पुनः सुचारू रूप से शुरू करवाने की अपील की है। अब देखना होगा कि खेल विभाग इस विषय पर कितना संजीदगी से निष्पक्ष निर्णय लेगा ताकि उभरती खेल प्रतिभाओं को न्याय मिल सके ।



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