Thursday, March 5, 2026
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वसंत पंचमी 2026: तिथि, समय, मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त

माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर शुक्रवार (23 जनवरी) को जिलेभर में विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ की जाएगी। पूजा को लेकर गुरुवार से ही स्कूल, कालेज और कोचिंग संस्थानों में तैयारियों का दौर तेज हो गया।

इस बार बसंत पंचमी का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी की तिथि 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन न केवल बसंत ऋतु का आगमन होगा, बल्कि मां सरस्वती की आराधना के लिए कई दुर्लभ और शुभ योगों का एक अद्भुत महासंयोग भी बन रहा है। बुद्धादित्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गजकेसरी योग जैसे शुभ संयोगों के कारण यह दिन करियर, शिक्षा और व्यापार में उन्नति के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है।

बसंत पंचमी से जुड़ी धार्मिक मान्यता:
शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इसी तिथि को देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि इस दिन विद्या की प्राप्ति, बुद्धि-विकास और ज्ञान-वृद्धि के लिए विशेष पूजा की जाती है।

बसंत पंचमी का महत्व केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। यह पर्व किसानों के लिए भी खास माना जाता है, क्योंकि इसी समय प्रकृति में बदलाव दिखने लगता है। ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम में बसंत का असर साफ नजर आता है। खेतों में गेहूं-जौ की बालियां और सरसों के पीले फूल वातावरण को रंगीन बना देते हैं।

विद्यारंभ के लिए सर्वोत्तम दिन:
देवी सरस्वती को सत्वगुण संपन्न और विद्या की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस तिथि को छोटे बच्चों के विद्यारंभ के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ती है और ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

कई परिवारों में बसंत पंचमी पर बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है। इस अवसर पर बच्चे किताब, कलम और स्लेट के साथ पूजा स्थल पर पहुंचते हैं और माता से आशीर्वाद लेते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त और विशेष योग:

बसंत पंचमी 2026 23 जनवरी 2026, शुक्रवार
बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त 2026 07:13 AM से 12:33 PM
अवधि 05 घण्टे 20 मिनट्स
बंसत पंचमी मध्याह्न का क्षण 12:33 PM
पंचमी तिथि प्रारम्भ 23 जनवरी, 02:28 AM बजे
पंचमी तिथि प्रारम्भ 24 जनवरी, 01:46 AM बजे

बसंत पंचमी को ‘स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस पूरे दिन किसी भी शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, वाहन या प्रॉपर्टी की खरीदारी के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि वर्ष 2026 में शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण इस दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। इसके बावजूद, संगीत, कला, बौद्धिक कार्यों और छोटे बच्चों के विद्यारंभ संस्कार (अक्षतारंभ) के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। विशेष रूप से मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए गजकेसरी योग मान-सम्मान और धन वृद्धि के संकेत दे रहा है।

पीले रंग का विशेष महत्व, अबीर-गुलाल से होती है शुरुआत:
बसंत पंचमी को पीले रंग का खास महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां सरस्वती को पीला रंग प्रिय है। इस कारण कई श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं और महिलाएं पीली साड़ी व चूड़ियां पहनकर पूजा करती हैं।

इस दिन कुछ स्थानों पर लोग अबीर-गुलाल भी उड़ाते हैं, जिससे होली के आगमन का संकेत माना जाता है। बसंत पंचमी के साथ ही फागुन की रंगत धीरे-धीरे लोगों के मन में उतरने लगती है।

सरस्वती पूजा की विधि:
पूजा के दिन स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई कर माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद गणेश पूजन और नवग्रह पूजन किया जाता है। फिर मां शारदा को गंगाजल से स्नान कराकर पीले पुष्प, अक्षत, दीप, धूप, पीला गुलाल और गंध अर्पित किया जाता है। माता को खीर, मालपुआ या सफेद मिठाई का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु सरस्वती वंदना कर मंत्र जाप भी करते हैं।

हवन के लिए मंत्र:
पूजा के बाद गणपति और नवग्रह के लिए हवन किया जाता है। इसके उपरांत ओम श्री सरस्वत्यै नमः स्वाहा मंत्र का 108 बार उच्चारण करते हुए माता का ध्यान कर हवन किया जाता है। हवन के बाद आरती कर विद्या, करियर में सफलता और बुद्धि-वृद्धि की कामना की जाती है।

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