(राजीव खनसली)
देहरादून, बजट की उपलब्धता न होने के कारण, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली परियोजना के तहत, अपने घर की छतों पर सोलर प्रोजेक्ट लगाने वाले हजारों लाभार्थियों को राज्य सोलर सब्सिडी के लिए भटकना पड़ रहा हैं।
विदित हो कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रोत्साहित किए जाने से, इस मुफ्त बिजली योजना के प्रति लोग बहुत उत्साहित हैं और इसके अच्छे परिणाम भी मिले हैं।
इस योजना में कुल 50,000 से लेकर 1,36,000 तक सब्सिडी का प्रावधान था। एक किलोवॉट सोलर सिस्टम के लिए 50,000 की सब्सिडी का प्रावधान था जिसमें 33,000 रु केंद्र व 17,000 रु राज्य से मिलते थे। दो किलोवॉट पर 1,00,000 की सब्सिडी में 66,000 केंद्र व 34,000 राज्य सरकार देती थी। इसी प्रकार, तीन किलोवॉट पर 1,36,800 की कुल सब्सिडी में 85,800 केंद्र सरकार व 51,000 राज्य सरकार द्वारा दिया जाता था।
लाभार्थियों को अपने घर की छतों पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करवाकर, विभागीय औपचारिकताओं को पूर्ण कर सब्सिडी के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। केंद्रीय सब्सिडी देने की जिम्मेदारी यूपीसीएल एवं राज्य सब्सिडी देने की जिम्मेदारी उरेडा की हैं। केंद्रीय सब्सिडी का भुगदान तो औसतन 3- 4 महीने में हो जाता हैं लेकिन राज्य सब्सिडी का भुगतान समय से नहीं हो रहा हैं। हजारों लाभार्थियों की सब्सिडी का भुगतान 7- 8 महीने से लंबित हैं।
उरेडा के अनुसार बजट की उपलब्धता के अनुसार सब्सिडी का भुगतान किया जाता हैं, जैसे ही बजट मिलेगा तो भुगतान कर दिया जाएगा।
अब नए शासनादेश के बाद लाभार्थियों की परेशानी और बढ़ गईं है। नए शासनादेश के अनुसार राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली 17,000 से 51,000 रु की सब्सिडी, केवल उन्हीं लाभार्थियों को दी जाएगी जिनके सोलर सिस्टम 31 मार्च 2025 तक संस्थापित और कमीशन हो जाएंगे। कई मामले ऐसे हैं कि सोलर सिस्टम जनवरी महीने में लगाए गये थे और उनके बिल भी जारी हो गए हैं। परन्तु प्रोजेक्ट पूर्णता रिपोर्ट, विभागीय वेबसाइट पर 31 मार्च से पूर्व ऑनलाइन न डालने के कारण, उन्हें राज सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया गया है ।



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