देहरादून, उत्तराखंड़ की अस्मिता और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संकल्पित ‘मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति’ की एक निर्णायक बैठक आज देहरादून में संपन्न हुई। महानगर प्रभारी अनिल डोभाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंदोलन को भविष्य में और अधिक संगठित, संस्थागत और धारदार बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संघर्ष समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि संघर्ष समिति किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ेगी और मूल निवास, भू कानून आंदोलन को जारी रखेगी ।
बैठक में संघर्ष समिति ने ऐलान किया कि समिति का एकमात्र लक्ष्य मूल निवास (1950) और सशक्त भू-कानून की मांग को लेकर आंदोलन को जारी रखना है। जल्द ही प्रदेश भर के सक्रिय सदस्यों की एक महारैली या बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सर्वसम्मति से नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी और पदाधिकारियों का चयन होगा। फिलहाल एक अंतरिम कार्यसमिति का गठन तय हुआ है, जो आगामी कार्यक्रमों और बैठकों की रूपरेखा तैयार करेगी।
समिति ने चर्चा की कि आज प्रदेश में मूल निवास, भू-कानून और गैरसैंण जैसे स्थानीय मुद्दों पर जो जन-जागरूकता आई है, वह उनके पिछले आंदोलनों की बड़ी सफलता है। आने वाले महीनों में समिति गैरसैंण में एक विशाल कार्यक्रम आयोजित करेगी, जिसमें प्रदेश के हर कोने से लोगों को जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। समिति की मुख्य मांग है कि उत्तराखंड का अपना कड़ा भू-कानून लागू हो, ताकि कृषि और सामुदायिक भूमि की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त रुक सके। आंदोलन को केवल शहरों तक सीमित न रखकर इसे गांव-गांव और घर-घर तक पहुँचाने के लिए युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। समिति के सदस्यों ने कहा कि आज प्रदेश का हर राजनीतिक दल और नेता इन मुद्दों पर बात करने को मजबूर है, यह हमारे संघर्ष की जीत है। अब हम अपनी देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और संसाधनों को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।”
बैठक के अंत में संकल्प लिया गया कि उत्तराखंड के सीमित संसाधनों पर मूल निवासियों का अधिकार सुनिश्चित होने तक यह संघर्ष थमेगा नहीं। बैठक में संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी, बिपिन नेगी, सुमित थपलियाल, राकेश नेगी, अर्जुन सिंह राणा, कनिष्क जोशी, आर्यन चौहान, प्रमोद काला, विनीत सकलानी, कमल कांत, प्रांजल नौडियाल, सूरज नेगी, अनिल डोभाल आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे ।



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