कोरोना की तीसरी लहर के संभावित खतरे के बीच वैक्सीन मिक्सिंग को लेकर स्टडी जारी, सीएमसी वेल्लोर करेगा ट्रायल

Covid Vaccines Mixing Trials कोरोना की तीसरी लहर के संभावित खतरे के बीच कोविड-19 वैक्सीन मिक्सिंग को लेकर स्टडी जारी है. भारत में भी वैक्सीन मिक्सिंग के प्रभाव को जानने की कोशिश की जाएगी. दवा नियामक बॉडी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इसकी मंजूरी दे दी है. सीएमसी वेल्लोर को वैक्सीन मिक्सिंग ट्रायल करने की अनुमति दी गई है.

केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप (Department of Biotechnology Secretary Dr Renu Swarup) ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डीसीजीआई ने सीएमसी वेल्लोर को टीकों के मिश्रण पर परीक्षण शुरू करने की अनुमति दी है. उन्होंने कहा कि इस तरह के कुछ शोध शुरू किए गए हैं. हमें अधिक स्पष्टता प्राप्त करने के लिए और अधिक वैज्ञानिक डेटा की आवश्यकता है. हैदराबाद स्थित बायोलॉजिक ई की कोविड-19 वैक्सीन के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. रेणु स्वरूप ने कहा कि इसका अडवांस ट्रायल चल रहा है. साथ ही वैक्सीन का निर्माण भी जारी है.

डॉ. रेणु स्वरूप ने कहा कि अभी तक इस वैक्सीन के नतीजे बहुत बेहतर रहे हैं. वैक्सीन के बाजार में आने की बात कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्भर करती है. वैक्सीन रोलआउट की संभावित तारीख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वैक्सीन वास्तव में कब शुरू होगी यह कई चीजों पर निर्भर करता है. हमें विश्वास है कि यह अच्छा होगा, क्योंकि अब तक इसने बहुत दिलचस्प परिणाम दिखाए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, बायोलॉजिक ई द्वारा पहले और दूसरे नैदानिक ​​परीक्षणों के लिए सितंबर के अंत तक या अक्टूबर की शुरुआत में अपने कोविड वैक्सीन कॉर्बेवैक्स ( Corbevax) के इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन के लिए डेटा प्रस्तुत करने की संभावना है.

उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक अब यह तलाशने की कोशिश में जुटे हुए हैं कि क्या वैक्सीन की अलग-अलग डोज लगने से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो जाती है. इस संबंध में वैज्ञानिक दो अलग-अलग वैक्सीन के मिश्रण और उसके परिणामों पर अध्ययन में जुटे हुए हैं. लोगों में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि क्या सच में वैक्सीन की अलग-अलग डोज ज्यादा प्रभावी है.

बीते महीने रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (RDIF) ने कहा था कि कुछ वॉलिंटियर्स पर वैक्सीन की मिक्स डोज का टेस्ट किया गया जिसमें किसी भी तरह का कोई दुष्परिणाम नहीं दिखा. आरडीआईएफ की तरफ से कहा गया कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की पहली खुराक को रूस की स्पूतनिक वी की पहली खुराक के साथ मिक्स कर दिया गया. वैक्सीन की खुराक देने के बाद किसी भी तरह के कोई गंभीर परिणाम सामने नहीं आए.