देहरादून, राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD), देहरादून के कर्मचारियों की पेंशन 1 जनवरी 2026 से बंद होने के खिलाफ मंगलवार दूसरे दिन भी कर्मचारियों का प्रदर्शन, गेट मीटिंग तथा तालाबंदी जारी रही। सरकार के स्तर पर इस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय लिए जाने की उम्मीद में सेवानिवृत कर्मचारी आज भी भारी निराश हुए। रिटायर्ड कर्मचारियों ने मांग की, कि इस संदर्भ में संस्थान की कार्यकारिणी परिषद के 21 नवंबर 1983 के परिपत्र और 20 फरवरी 1995 के निर्णय, जिसमें मंत्रालय द्वारा संस्थान के कर्मचारियों लिए CCS पेंशन Rules 1972 को लागू करने का पत्र जारी किया गया के आलोक में कार्रवाई की जाए और निर्णय लिए जाएं। कर्मचारिर्यों ने अपने प्रदर्शन के दौरान पेंशन के अलावा संस्थान से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए। उन्होंने संस्थान में पिछले चार वर्षों से निदेशक की नियुक्ति न होने पर गहरी निराशा व्यक्त की।
कर्मचारियों का कहना है कि निदेशक के अभाव में अधिकारी निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण निर्णयों के क्रियान्वयन में अनावश्यक रूप से अत्यधिक विलंब हो रहा है। संस्थान के कर्मचारियों के मेडिकल बिल आदि समय पर पास होने में बहुत समय लगता है। इसी तरह पिछले 10 12 साल से भी अधिक समय से आउटसोर्स और अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में हर वर्ष 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि का जो प्रावधान किया गया था, वह भी उन्हें नहीं दिया जा रहा। इसके लिए यदि किसी से बात करने की कोशिश की जाती है तो सक्षम प्राधिकारी के न होने से उनकी मांगों पर कोई उचित कार्रवाई नहीं होती। प्रदर्शन में यह मुद्दा भी उठाया गया कि माननीय उच्च और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कर्मचारियों के पक्ष में कई फैसले दिए गए हैं लेकिन संस्थान प्रशासन उनका लागू नहीं करता, जिससे कर्मचारी न्याय से वंचित हो रहे हैं। यूनियन ने मांग की कि न्यायालय के ऐसे सभी निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।
आज की गेट मीटिंग में रिटायर्ड कर्मचारियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि संस्थान के स्तर के उच्चीकरण में वे अपनी बात रखने के लिए वे सचिव से मिलकर अपनी बात रखेंगे। आज के प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आकर कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया।



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