Saturday, April 18, 2026
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देहरादून: Navdanya में ‘डाइवर्स वूमेन फॉर डाइवर्सिटी इंटरनेशनल फेस्ट’ का भव्य समापन; 7 देशों की महिलाओं ने भरी हुंकार

देहरादून। Navdanya के बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन फार्म में आयोजित ‘डाइवर्स वूमेन फॉर डाइवर्सिटी इंटरनेशनल फेस्ट 2026’ का रविवार को समापन हो गया। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का विषय “क्लाइमेट रेज़िलिएंस एंड रीजेनेरेशन” रखा गया था। कार्यक्रम की शुरुआत 6 मार्च को Dehradun में हुई थी, जो 8 मार्च को International Women’s Day के अवसर पर संपन्न हुआ।

महोत्सव में सात देशों के करीब 14 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि भारत के नौ राज्यों से आई 150 से अधिक महिलाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन की विविधता, संस्कृति, देशी भोजन और पारंपरिक ज्ञान का उत्सव मनाना रहा।May be an image of ‎dais, wedding and ‎text that says "‎DIVERSE WOMEN NVERSEWOMENFORDIVERSITY DIVERSEWOMEN FOR DIVERSITY 域 Celebrating RESILIENCE ΤΙΟΝ الواا‎"‎‎

महोत्सव के दौरान महिलाओं ने ‘गार्डन ऑफ होप’ तैयार कर आशा के बीज बोए और ‘ब्रेड्स ऑफ फ्रीडम’ साझा करते हुए धरती माता के प्रति सम्मान प्रकट किया। विभिन्न क्षेत्रों से आई महिला किसानों ने प्रार्थना, संगीत, नृत्य और पारंपरिक गीतों के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

कार्यक्रम का नेतृत्व प्रख्यात पर्यावरणविद् Vandana Shiva ने किया, जो नवदान्या की अध्यक्ष हैं। विभिन्न राज्यों की महिलाओं ने पारंपरिक बीजों के संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अपने अनुभव और गीत साझा किए। साथ ही विभिन्न देशों से आई प्रतिभागियों ने स्थानीय भोजन, बीज संरक्षण और खाद्य संप्रभुता से जुड़ी परंपराओं पर विचार साझा किए।

समापन सत्र में आशा के बीजों की बुवाई के बाद डॉ. वंदना शिवा ने कहा कि भारत की शक्ति, सुंदरता, बीज और जैव विविधता को बचाना आज सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। विश्व महिला दिवस के अवसर पर हमें इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कमजोर और धरती को मृत मानना गलत है। धरती अपने स्वास्थ्य की देखभाल स्वयं करती है, लेकिन जहरीले रसायनों से उसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि करोड़ों वर्षों से पृथ्वी का तापमान संतुलित रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ के कारण ग्लोबल वार्मिंग गंभीर रूप लेती जा रही है।

इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक Meera Shiva, अमेरिका से पर्यावरण विशेषज्ञ सुश्री डेब्बी डार्लियर और सुश्री कैरोलिन ने मंच साझा किया। कैरोलिन और भावना ने महिला दिवस के अवसर पर क्रमशः अंग्रेजी और हिंदी में घोषणा पत्र का वाचन किया।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी के साथ ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की महिला किसानों ने जैविक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और बीज, भोजन व जैव विविधता से जुड़े गीतों पर सामूहिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन भावना सेमवाल ने किया।

महोत्सव में लद्दाख, असम, हैदराबाद, गुजरात और चंडीगढ़ से भी प्रतिभागी शामिल हुए। वहीं अमेरिका, जर्मनी, फिलीपींस, ब्रिटेन और नेपाल सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर जलवायु, जैव विविधता और टिकाऊ खाद्य प्रणाली से जुड़े अनुभव साझा किए।

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