हरिद्वार (कुलभूषण)आर्ष गुरुकुल एटा के स्नातक एवं गुरुकुल ट्रस्ट एटा के मन्त्री प्रो. विनय विद्यालंकार ने उत्तराखंड संस्कृत संस्थान हरिद्वार के सचिव पद पर कार्यभार ग्रहण किया, उनकी नियुक्ति महामहिम राज्यपाल उत्तराखंड की अनुज्ञा से सचिव संस्कृत शिक्षा उत्तराखण्ड शासन ने अगले तीन वर्ष के लिए की है।
उच्च शिक्षा निदेशालय हल्द्वानी के अन्तर्गत राजकीय महाविद्यालय, बेतालघाट (नैनीताल) के प्रिंसिपल पद पर कार्यरत थे। अविभाजित उत्तर प्रदेश के लोक सेवा आयोग द्वारा १९९८ में असिस्टेंट प्रोफेसर (प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी) के रूप में उनका चयन हुआ। इससे पूर्व लोहाघाट, काशीपुर, रामनगर, हल्द्वानी के राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत रहे हैं। चम्पावत कैंपस विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष एवं गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में शिक्षा संकाय के डीन रह चुके है।
राष्ट्रीय, अन्तर्राष्टीय कांफ्रेंस, सेमिनार , कार्यशालाओं में विषय विशेषज्ञ, मुख्य वक्ता एवं रिसोर्स पर्सन रहे हैं। अनेक सम्मेलनों के संयोजक एवं अध्यक्ष रहे। अमेरिका, मॉरिशस आदि दोनों में अनेक बार विशिष्ट वक्ता रहे। भारतीय संस्कृति एवं वैदिक ज्ञान परम्परा के सिद्ध विद्वान् हैं। आपकी शिक्षा आर्ष गुरुकुल एटा एवं गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, श्रीलालबहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय से हुई है। प्रो. महावीर अग्रवाल, प्रो. वेदप्रकाश शास्त्री, डॉ वागीश आचार्य, व्याकणाचार्य पं विश्वदेव शर्मा आदि से आपको अध्ययन करने एवं वेद-वेदांग का मर्म ज्ञात करने का अवसर मिला। आर्ष गुरुकुल ट्रस्ट के प्रधान योगराज अरोड़ा , कुलाधिपति डॉ वागीश आचार्य, प्रो ओमनाथ बिमली (मानद कुलपति-आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय, एटा, निदेशक-हिन्दू अध्ययन केन्द्र दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ अवनीश कुमार, प्रो. कमलेश चौकसी (अध्यक्ष- स्नातक परिषद्,गुरुकुल एटा), प्रो सुरेन्द्र कुमार (महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक), श्री भारतेन्दु विमल (पूर्व – बीबीसी लंदन) डॉ हरिदेव आर्य, डॉ देवेश प्रकाश आर्य (विश्व वेद परिषद्,दिल्ली) ने शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए संस्कृत एवं संस्कृति की सेवा की आशा जताई।
इस अवसर पर श्रीभगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो कृष्ण कुमार पाण्डेय, डाॅ शिवदेव आर्य, संस्कृत शिक्षा के उपनिदेशक डाॅ वाजश्रवा आर्य, संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डाॅ प्रकाश चन्द्र पन्त, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के डाॅ वेदव्रत, डाॅ योगेश कुमार, डाॅ विजेंद्र कुमार तथा उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के शोध अधिकारी डॉ हरीश चन्द्र गुरुरानी, प्रकाशन अधिकारी किशोर लाल रतूड़ी, प्रशासनिक अधिकारी लीला रावत, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष रमा कठैत, मनीषा चंचल, गणेश प्रसाद फोन्दणी, आकांक्षा, विवेक, मोहित, संतोष, ओमप्रकाश आदि ने स्वागत कर शुभकामनाऐं दी।


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