Monday, April 28, 2025
Home Blog Page 1792

एक्ट्रेस दिव्या भटनागर पर वेंटिलेटर पर, कोविड टेस्ट निकला पॉजिटिव

0

टीवी और फिल्म एक्ट्रेस दिव्या भटनागर 6 दिन वेंटिलेटर पर हैं। परिवार की मानें तो एक्ट्रेस की सेहत में कोई सुधार नहीं आया है और वे उनके होश में आने का इंतजार कर रहे हैं। दिव्या की तबियत बिगड़ने के बाद फैमिली मेंबर्स ने उन्हें मुंबई के एक मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल सेवन हिल्स में एडमिट कराया था। उनका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया था।

‘ठीक होने में 20-25 दिन लग सकते हैं’

दैनिक भास्कर से बातचीत में दिव्या के छोटे भाई देव भटनागर ने बताया, “डॉक्टर्स अपनी ओर से ट्रीटमेंट में कोई कमी नहीं रख रहे। हालांकि, उनके मुताबिक दीदी को ठीक होने में 20-25 दिन और लग सकते हैं। अभी तक वे होश में नहीं आई हैं। हम सब उनके लिए दुआ कर रहे हैं। उनकी तबियत काफी खराब हो रही है। कोरोना के अलावा उन्हें हाइपरटेंशन भी हो गया है। पर्सनल प्रॉब्लम्स के चलते उन्होंने बहुत स्ट्रेस ले लिया है, जो उनकी इस हालत का जिम्मेदार बना।”

पब्लिसिटी के लिए पति ने हॉस्पिटल में संपर्क किया

देव की मानें तो दिव्या के पति गगन ने उन्हें अस्पताल में संपर्क करने की कोशिश की थी। लेकिन सिर्फ पब्लिसिटी के लिए। वे कहते है, “गगन और उनके फैमिली मेंबर्स मेरी बहन को टॉर्चर कर रहे हैं। दिव्या ICU में हैं। इसके बावजूद वे उन्हें वीडियो कॉल कर रहे हैं। वे जान-बूझकर लगातार कॉल कर रहे हैं।”

देव ने आगे कहा, “ऐसी स्थिति में कौन अपनी बीवी का वीडियो बनाता है? पैसे और फेम के लिए, वे ये सब कर रहे हैं। वे बिल्कुल पैसे नहीं कमाते। एक बार मेरी बहन की तबियत ठीक हो जाए, फिर इस मामले को भी देखेंगे।”

‘आर्थिक स्थिति ठीक है, इलाज करा सकते हैं’

देव ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक है और वे अपनी बहन का इलाज करा सकते हैं। साथ ही इंडस्ट्री के कुछ एसोसिएशन, प्रोड्यूसर्स और एक्टर्स भी दिव्या के इलाज के लिए आर्थिक मदद के लिए सामने आए है।

सांस लेने में तकलीफ के बाद ले गए थे अस्पताल

दिल्ली से मुंबई पहुंचीं दिव्या की मां डॉली ने पिछले दिनों दैनिक भास्कर को बताया था, “दिव्या को 5 दिनों से बुखार था। फिर सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। एक्स-रे निकालने पर पता लगा कि उसे निमोनिया हुआ है, जिसके बाद हमने उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। उसका ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो गया था। उसकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। मेरी बेटी की कंडीशन बहुत क्रिटिकल है। वह वेंटिलेटर पर है। हम सभी दुआ कर रहे हैं कि वह इस गंभीर स्थिति से जल्द से जल्द बाहर आ जाए।”

इन सीरियल्स में किया दिव्या ने काम

दिव्या ने सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में गुलाबो का रोल किया है। उन्हें ‘उड़ान’, ‘जीत गई तो पिया मोरे’ और ‘विष’ जैसे टीवी सीरियल्स के लिए भी जाना जाता है। फिलहाल वे शशि-सुमित प्रोडक्शन हाउस के टीवी शो ‘तेरा यार हूं मैं’ में काम कर रही थीं। दिव्या की मां की मानें तो उनका बेटा प्रोडक्शन हाउस के संपर्क में हैं, जो दिव्या के ट्रीटमेंट में आर्थिक मदद कर रहा है।

देवर-भाभी का प्रेम प्रसंग, देवर शादी हुई शादी तय, तो दोनों फांसी लगा दे दी जान

0

फतेहपुर, उत्तर प्रदेश के जनपद फतेहपुर में देवर भाभी पर प्यार का ऐसा रंग चढ़ा कि दोनों ने एक साथ ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, वाकया फतेहपुर जिले के गाजीपुर थाना क्षेत्र के ब्राम्हणतारा गांव का बताया जा रहा है, जहां प्रेम प्रसंग के चलते देवर भाभी ने फांसी लगाकर जान दे दी, सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है |

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मृतक सुनीता (28 साल) का प्रेम प्रसंग अपने देवर राम मिलन (22 साल) के साथ चल रहा था, इसी बीच परिजनों ने मृतक देवर राम मिलन की शादी तय कर दी थी | उसकी शादी अगले साल 7 मई 2021 को होने थी, इसी को लेकर दोनों ने बीती रात साड़ी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली
सुबह लोगों ने दोनों को लटकते देखा तो पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल शुरू की. फॉरेंसिक टीम से भी मौका मुआयना कराकर साक्ष्य एकत्रित कराया गया. इस घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है |

मृतक युवक के बड़े भाई और सुनीता के पति हरिओम ने पुलिस को बताया कि ”उसके एक तीन साल का बेटा और तीन माह की बेटी है. छोटे भाई और पत्नी के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था” | एडिशनल एसपी राजेश कुमार का कहना है कि इस संबंध में ससुर शिव बरन ने थाने में तहरीर दी है. जिस पर पुलिस विधिक कार्रवाई कर रही है. कई एंगल से इस सुसाइड केस की जांच की जा रही है |

नियोजन विभाग के सहयोग तैयार एसडीजी डैश बोर्ड का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन

0

देहरादून, मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को सचिवालय में यू.एन.डी.पी तथा एवं सेंटर फाॅर पब्लिक पाॅलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस, नियोजन विभाग के सहयोग से तैयार सस्टनेबल डेवलपमेंट गोल (एस.डी.जी) मोनिटरिंग हेतु तैयार डैश बोर्ड का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि 2030 तक सतत विकास का जो लक्ष्य रखा गया है, इसके लिए और तेजी से प्रयासों की आवश्यकता है। इस दिशा में कुछ क्षेत्रों में अच्छा कार्य हुआ है। राज्य में कुपोषण से मुक्ति के लिए चलाये गये अभियान, अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना, जल संचय, संरक्षण तथा नदियों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में भी अनेक प्रयास किये गये हैं। लोगों को स्वच्छ एवं उच्च गुणवत्तायुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र एक रूपये में पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में भी जल्द ही पानी का कनेक्शन सस्ती दरों पर दिया जायेगा। इन सभी प्रयासों के आने वाले समय में बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। जिला योजना का 40 प्रतिशत बजट स्वरोजगार के लिए खर्च किया जा रहा है। उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग करने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। भारत नेट 2 से नेटवर्किंग और कनेक्टिविटी बढ़ेगी, इसका भी लोगों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि लक्ष्यों के आधार पर जो भी योजनाएं बनाई गई हैं, उनको पूरा करने के लिए नियमित माॅनिटरिंग भी की जाय। विजन 2030 राज्य के भविष्य व आर्थिक विकास की रूपरेखा है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि सतत विकास लक्ष्य के लिए जो 17 क्षेत्र चुने गये हैं, उनमें दिये गये सभी इन्डीकेटर पर किये जा रहे कार्यों की समय-समय पर समीक्षा की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि डैशबोर्ड में सभी जनपद समय-समय पर अपनी उपलबिधयां अपलोड करेंगे तथा रैंकिंग के आधार पर जिन योजनाओं/ इंडीकेटरों में कमी प्रदर्शित होती है उनको प्राथमिकता में लेते हुए सतत विकास का लक्ष्य कार्यान्वयन में सुधार करने के हर संभव प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने सतत विकास लक्ष्य के विभिन्न आयामों गरीबी समाप्त करने, कुपोषण को कम करने, स्वस्थ जीवन, गुणवत्तापरक शिक्षा, लैंगिक समानता, शुद्ध पेयजल तथा स्वच्छता, स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिकी में वृद्धि, राज्य में असमानताओं को कम करने, शहरों के विकास, जलवायु परिवर्तन, वनों का प्रबंधन तथा जैव विविधता की रक्षा करने तथा त्वरित न्याय के साथ सुशासन हेतु संस्थानों को मजबूत बनाने पर बल दिया।

अपर मुख्य सचिव नियोजन, श्रीमती मनीषा पंवार ने कहा कि राज्य में सतत विकास लक्ष्य के क्रियान्वयन हेतु 2018 में उत्तराखण्ड विजन 2030 बनाया गया। जो 17 क्षेत्रों में वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु रौडमेप प्रदान कर रहा है। नीति आयोग भारत सरकार के दिशा निर्देशों पर 371 संकेतक चयनित किये गये हैं, जिसमंे राष्ट्रीय संकेतक तथा राज्य की प्रासंगिकता के अनुसार संकेतक सम्मिलित हैं। यूएनडीपी की राष्ट्रीय प्रमुख सुश्री शोको नोडा ने कहा कि उत्तराखण्ड ने एसडीजी के फ्रेमवर्क निर्माण एसडीजी के स्थानीयकरण में सराहनीय कार्य किया है।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सी.पी.पी.जी.जी डाॅ. मनोज कुमार पंत द्वारा सतत विकास लक्ष्यों के सबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लक्ष्य के अनुसार विभागों को चिन्हित करते हुए योजनाओं तथा संकेतकों की मैपिंग का कार्य पूर्ण किया गया है। जिसको पुस्तिका के रूप में जनपद स्तर से ग्राम पंचायत स्तर तक वितरित किया गया है।
इस अवसर पर सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, डाॅ. पंकज पाण्डेय, श्री सुशील कुमार, यूएनडीपी की स्टेट हैड सुश्री रश्मि बजाज, वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जिलाधिकारी तथा सीडीओ उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड़ : भाजपा महानुभाओं को सौंपे गये दायित्व, शेरसिंह गड़िया बने बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष

0

देहरादून, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा विभिन्न महानुभावों को दायित्व सौपें गये हैं। यह जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के मीडिया कोर्डिनेटर  दर्शन रावत ने बताया कि  शेर सिंह गड़िया, पूर्व विधायक बागेश्वर को उपाध्यक्ष, राज्य स्तरीय बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति तथा  विनय रोहिला, ऊधम सिंह नगर को उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग का दायित्व सौंपा गया है। इन्हें कैबिनेट मंत्री स्तर प्रदान किया गया है।

इसके साथ ही अनिल नौटियाल, पूर्व विधायक कर्णप्रयाग, उपाध्यक्ष, उत्तराखण्ड औषधीय पादप बोर्ड,  संजय सहगल, हरिद्वार को उपाध्यक्ष राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार एवं अनुश्रवण परिषद्, राजपाल सिंह रावत देहरादून उपाध्यक्ष प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अनुश्रवण परिषद्,  गोविन्द पिल्खवाल, अल्मोड़ा को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड,  जगवीर सिंह भण्डारी, उत्तरकाशी को उपाध्यक्ष राज्य बागवानी बोर्ड,  तरूण बंसल हल्द्वानी को उपाध्यक्ष राज्य स्तरीय उद्योग मित्र परिषद्,  संजय नेगी, टिहरी गढ़वाल को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड अन्य पिछडा वर्ग आयोग, सुरेन्द्र मोघा, ऋषिकेश को उपाध्यक्ष समाज कल्याण योजना अनुश्रवण समिति का दायित्व सौंपा गया है। इन सभी को राज्य मंत्री स्तर प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त ले0ज0 जयवीर सिंह नेगी को सलाहकार, मा0 मुख्यमंत्री, सैन्य एवं सीमांत क्षेत्र सुरक्षा बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने सभी दायित्व धारकों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि वे अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और कुशलता के साथ निर्वहन करेंगे। उनके अनुभवों का लाभ प्रदेश को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमो व जनहित में किये गये कार्यों की जानकारी जन जन तक पहुँचाने की भी अपेक्षा की है।

ऐतिहासिक गीत “बीर बाला तीलू रौतेली” का हुआ विमोचन

0

देहरादून,  ए प्लस स्टूडियो देहरादून में एक ऐतिहासिक गीत “बीर बाला तीलू रौतेली” का विमोचन किया गया । इस गीत के रचनाकार व गायक संतोष खेतवाल  हैं व उनके साथ में प्रसिद्ध गायिका अनुराधा निराला ने इस गीत को गाया है, साथ ही इस गीत को उत्तराखण्ड के बहुचर्चित संगीतकार रणजीत सिंह ने अपने सुमधुर संगीत से साजाया है। व इसके रिकाॅर्डिस्ट हैं अश्वजीत सिंह।

इस गीत का अलाप गायन संकल्प खेतवाल (स्टार प्लस के दिल है हिन्दुस्तानी फेम) ने किया है। इस गीत में गौरी बख्शी ने विशेष आर्ट का प्रदर्शन किया है व इसकी ऐडिटिंग आर. के. सी. जी. टीम के द्वारा की गयी है।
श्रीमती पुष्पा खेतवाल जी इस गीत की निर्मात्री हैं। इस उपलक्ष में संतोष खेतवाल, रणजीत सिंह, गायक मिलन आजाद, ऐडिटर प्रदीप चमोली, गित्यार ललित, गायिका सुषमा कुमारी व अश्वजीत सिंह मौजूद रहे। इस गीत में आपको तीलू रौतेली की सम्पूर्ण जीवनी सुनने व देखने को मिलेगी, यह गीत संतोष खेतवाल जी के ही यूट्यूब चैनल एस. के गढ़वाली फोक म्यूजिक से रिलीज हुआ है।

परिजनों की डांट से नाराज किशोर ने फांसी लगा की आत्महत्या

0

रुडकी। परिजनों की डांट से नाराज किशोर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव पंखे से लटका देख परिजनों की चीख-पुकार निकल गई। शोर-शराबा होने पर क्षेत्रवासी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कमरे से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के शक्ति विहार पाडली गुर्जर निवासी 17 वर्षीय किशोर को परिजनों ने काम में लापरवाही बरतने को लेकर रविवार को डांट दिया।

इसके बाद आहत किशोर ने परिजनों से बातचीत करना बंद कर दिया। शाम के वक्त परिजन किसी काम से घर से बाहर गए। इस बीच किशोर घर में अकेला था। परिजनों की गैरमौजूदगी में देर शाम उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन घर वापस लौटे तो उन्हें आत्महत्या करने की जानकारी मिली। शोर-शराबा सुनकर क्षेत्रवासी घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।

सूचना पाकर गंगनहर पुलिस मौके पर पहुंची और किशोर के शव को कमरे से बरामद किया। इंस्पेक्टर मनोज कुमार मैनवाल ने बताया कि किशोर काफी समय से नाई का काम सीख रहा था लेकिन कुछ दिनों से काम पर ध्यान नहीं दे रहा था। इसी बात को लेकर परिजनों की उससे कहासुनी हो गई थी। इससे नाराज होकर नाबालिग ने रविवार देर शाम परिजनों की गैरमौजूदगी में पंखे पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

उत्तराखंड : कोरोना के प्रदेश में आज मिले 473 संक्रमित,सात की मौत, दून में 164 संक्रमित मिले

0

‘राज्य में 68365 मरीज हुए है ठीक, कोरोना संक्रमण से अबतक 1238 लोगों की हुई मौत’

देहरादून | उत्तराखंड में 01 दिसम्बर को हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार कोरोना मरीजो की संख्या हुई 75268 आज कुल 473 नए मामले मिले , वही 68365 मरीज हुए है ठीक जबकि कोरोना संक्रमण से अबतक 1238 लोगों की मौत हुई है | हेल्थ बुलेटिन के अनुसार प्रदेश में आज 07 लोगों की मौत हुई | मंगलवार 1 दिसम्बर को देहरादून में 164, हरिद्वार में 40, पौड़ी में 26, नैनीताल में 24, पिथौरागढ़ में 51, अल्मोड़ा में 32, चमोली में 43, उधमसिंहनगर में 24, टिहरी में 25 कोरोना संक्रमण के नए मामले मिले है |

निर्माण कार्यो में मानको को दर किनारे कर किया जा रहा है निर्माण कार्य: भाटी

0

हरिद्वार 01 दिसम्बर (कुल भूषण शर्मा) दूधाधारी चौक से सूखी नदी तक सड़क के दोनों ओर चल रहे इंटर लॉकिंग टाईल्स फुटपाथ निर्माण कार्य में बरती जा रही अनियमितताओं व मानकों की अनदेखी से आक्रोशित संतजनों, व्यापारियों व स्थानीय जनों ने क्षेत्रीय पार्षद अनिरूद्ध भाटी, पार्षद विनित जौली, पार्षद प्रतिनिधि विदित शर्मा के नेतृत्व में मानकों के अनुरूप कार्य न होने पर कार्य को रूकवाकर बरती जा रही अनियमितताओं के जांच की मांग की।।

भाजपा पार्षद दल के उपनेता अनिरूद्ध भाटी ने कहा कि कुम्भ मेले में लोक निर्माण द्वारा दूधाधारी चौक से सुखी नदी तक सड़क के दोनों ओर टाईल्स लगाने का कार्य ठेकेदार के माध्यम से करवाया जा रहा है। लोक निर्माण के अधिकारियों की लापरवाही से ठेकेदार टाईल्स निर्माण के कार्य में मानकों की धज्जियां उड़ा रहा है। दूधाधारी से सुखी नदी तक 10 स्थानों पर पानी की लीकेज हो रही है। जिस संदर्भ में ठेकेदार व जल संस्थान के अधिकारियों को अनेक बार अवगत भी कराया गया। हठधर्मिता दिखाते हुए ठेकेदार ने पानी की लीकेज की मरम्मत कराये बिना टाईल्स बिछाने का कार्य किया जा रहा है। ।

निर्माण कार्य में घटिया सीमेंट का प्रयोग किया जा रहा है। मौके पर न तो लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, कर्मचारी गुणवत्ता की जांच करते हैं न ही ठेकेदार की ओर से निर्माण स्थल पर इंजीनियर रहते हैं। अनिरूद्ध भाटी ने कहा कि कुछ अधिकारी भाजपा सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। ।
महंत स्वामी कमल दास ने कहा कि उत्तरी हरिद्वार में यात्रियों व संतों का सर्वाधिक दवाब रहता है। निर्माण कार्यों में जिस प्रकार लापरवाही बरती जा रही है यदि अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली नहीं सुधारी तो संत समाज आन्दोलन को बाध्य होगा।।

पार्षद विनित जौली ने कहा कि लोक निर्माण विभाग व ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया साम्रगी का प्रयोग निर्माण कार्य में किया जा रहा है। ।
इस अवसर पर मुख्य रूप से मां गंगा भागीरथी व्यापार मंडल के अध्यक्ष सूर्यकान्त शर्मा, अनुपम त्यागी, संतोष महेश्वरी, आदर्श पांडे, जसवीर, मुकेश राणा, दिनेश शर्मा, इन्दर कपूर, नरेश पाल, प्रमोद पाल, इन्दर कौशिक, रूपेश शर्मा, नीरज शर्मा, संदीप गोस्वामी, अनिल प्रजापति, मुनीश सिंह, भारत नन्दा, आदित्य राणा, सोनू पंडित, सुखेन्द्र तोमर, रामदयाल यादव सहित आश्रमांे और धर्मशालाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।।

हिमालय को शोध के केंद्र में रखें हिमालय क्षेत्र के विश्वविद्यालय : डाॅ. निशंक

0

“गढ़वाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले केंद्रीय शिक्षा मंत्री, मानव जाति की सेवा कर देवभूमि का ऋण चुकाएं डिग्री धारक छात्र”

(डॉ.वीरेन्द्र बर्त्वाल)
देहरादून, आप लोगों ने हिमालय में साधना की है, अध्ययन-ज्ञानार्जन किया है, हिमालय के गुण ग्रहण किए हैं। अब समय आ गया है इन सबको पूरे भारत और विश्व के लिए उपयोगी बनाएं, मानवजाति की सेवा करें और इस पुण्य देवभूमि का ऋण चुकाएं। हेमवती नंदन गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यह भावभरा आह्वान था केंद्रीय मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक का। मौका था-विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह का।
पर्यावरण में हिमालय के योगदान और मानवजाति के कल्याण में हिमालय के महत्त्व को रेखांकित करते हुए डाॅ. निशंक ने पीजी और पीएचडी कर चुके छात्रों का आह्वान किया कि कठिन परिश्रम के बूते स्वयं को अपने-अपने क्षेत्रों में सिद्ध करें, क्योंकि आप लोगों के सामने असली चुनौतियां और सवाल अब खड़े हैं।

जिस प्रकार गंगा उत्तराखंड से निकलकर करोड़ों लोगों के पाप धोते हुए गंगा सागर में मिल जाती है, उसकी प्रकार आप लोग इस धरती से निकलकर देश-दुनिया के दुःख हरने के लिए विभिन्न स्थानों पर जाएं। उन्होंने कहा कि हिमालयी विश्वविद्यालयों को हिमालय पर केंद्रित शोध को प्राथमिकता देकर इसका उपयोग पूरी मानव जाति के कल्याण के लिए करना होगा। हिमालय में जैवविविधता है, यह जड़ी-बूटियों का उत्पादक है, यहां नाना प्रकार की वनस्पति है, यह पर्यावरण की पहली पाठशाला है, यह संपदाओं का खजाना है, इसकी अद्भुत संरचना है,

इस पर बहुत अध्ययन और शोध की आवश्यकता है। हिमालय पलायन रोकने में कारगर साबित हो सकता है। हिमालय उत्तराखंड के लिए ही हितकारी नहीं, पूरे भारत और विश्व के लिए कल्याणकारी है। नरेंद्र को विवेकानंद बनाने वाला यह हिमालय ही है।
अध्ययन और शोध में गढ़वाल विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं भी इस विश्वविद्यालय का छात्र रहा हूं। उन्होंने विश्वविद्यालय का आह्वान किया कि वह नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाए। यह नीति आत्मनिर्भर भारत का सर्वश्रेष्ठ दस्तावेज है। दुनिया के अनेक देश आज इसकी खूबियों के लिए हमारी सराहना कर रहे हैं और इसे अपने यहां लागू करने को उत्सुक हैं। यह नीति रोजगार ही नहीं देगी, विश्वशांति स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि यह ’वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा और मानव मूल्यों पर आधारित और केंद्रित है।

विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो.धीरेंद्र पाल सिंह ने गढ़वाल विश्वविद्यालय में बिताए अपने शोध काल के समय को याद करते हुए छात्रों का आह्वान किया कि वे संस्कारों को साथ लेकर जाएं।
कुलाधिपति डाॅ. योगेंद्र नारायण ने डाॅ. निशंक का परिचय देते हुए कहा कि 75 से अधिक पुस्तकों के रचयिता, अनेक देशों से पुरस्कार प्राप्त और नई शिक्षा नीति जैसी महत्त्वपूर्ण पाॅलिसी को लाने वाले ऐसे केंद्रीय मंत्री पर पूरे देश को गर्व है। उन्होंने डाॅ. निशंक को हाल ही में ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान से अलंकृत किए जाने और कैंब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा नई शिक्षा नीति में बेहतर सुधारों के लिए सम्मानित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्हें बधाई दी।

कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने विश्वद्यालय की उपलब्धियां गिनाते हुए आत्मनिर्भर भारत, वोकल फाॅर लोकल जैसे अभियानों और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय की ओर से यथासंभव योगदान देने की घोषणा की। पर्यावरण के क्षेत्र में डाॅ. निशंक की उपलब्धियों और स्पर्श गंगा, नमामि गंगे, स्पर्श हिमालय अभियान में उनकी महत्त्वपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की प्रगति में डाॅ. निशंक का बड़ा योगदान है, क्योंकि वे यहां के हर कार्य और विकास में गहन रुचि लेते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय कोविड-19 काल की चुनातियों का बखूबी सामना कर रहा है। कुछ माह पहले तीनों परिसरों में कोविड नियमों का पालन करते 48 हजार छात्र-छात्राओं की आॅनलाइन परीक्षाएं आयोजित की गईं। छात्रों को आॅनलाइन अध्ययन कराया जा रहा है, हमारे यहां ई-बुक उपलब्ध हैं।

कार्यक्रम में कला, संचार एवं भाषा, लाॅ, जीव विज्ञान, प्रबंधन, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के 1117 विद्यार्थियों को पीजी, 137 को पी-एचडी, 12 को एमफिल डिग्रियां दी गयीं तथा 42 विद्यार्थियों को स्वर्णपदक प्रदान किए गए। कुलपति डाॅ. एनएस पंवार ने अतिथियों का धन्यवाद किया। इस वर्चुअल कार्यक्रम में डाॅ. बीए बौड़ाई, डाॅ. एससी बागड़ी, प्रो. एएन पुरोहित, डाॅ. दिनेश नौरियाल,प्रो. सुमित्रा कुकरेती, पर्वतारोही बछेंद्री पाल, डाॅ. कैलाशचंद्र शर्मा, प्रो. मृदुला जुगरान समेत विभिन्न संकायों के अध्यक्ष तथा अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।

 

सात समुद्र पार फहरी संस्कृत की पताका : न्यूजीलैंड के भारतीय मूल के सांसद डाॅ. गौरव ने ली संस्कृत में शपथ

0

डॉ. गौरव का यह कदम करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणादायक : डाॅ. निशंक

(डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल)

देहरादून, हम भले ही अंग्रेजी का इस्तेमाल कर अपने को समाज में बड़ा आदमी दिखाने की कोशिश करें, लेकिन हकीकत यह है कि हमारी प्राचीन भाषा संस्कृत का महत्त्व भारत ही नहीं, सात समुद्र पार तक फैला हुआ है। देववाणी के नाम से विख्यात इस समृद्ध भाषा को कंप्यूटर के लिए सर्वश्रेष्ठ भाषा करार दिया जा चुका है। यह इसकी वैज्ञानिकता का प्रमाण है। हाल ही में न्यूजीलैंड के सांसद भारतीय मूल के डाॅ. गौरव शर्मा के संस्कृत में शपथ लेने से देश-दुनिया में इस भाषा का गौरव बढ़ा है। यह भारत में अंग्रेजी को बेवजह अपना रहे लोगों के लिए यह एक सबक है।

डाॅ. गौरव शर्मा न्यूलीलैंड के हैमिल्टन पश्चिम से लेबर पार्टी के सांसद चुने गए हैं। 33 वर्षीय गौरव का पैतृक घर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के लोअर हड़ेटा गांव में है। उनका जन्म 01 जुलाई, 1087 को हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर मे हुआ था। वे 2017 में चुनाव हार गए थे। उनकी जीत पर वहां रह रहे भारतीय मूल के अनेक नागरिकों ने प्रसन्नता व्यक्त की। शपथ ग्रहण समारोह में डाॅ. शर्मा ने पहले वहां की भाषा मोरी और इसके बाद संस्कृत में शपथ ली। उनके इस फैसले की सर्वत्र सराहना की गयी, क्योंकि उन्होंने अपने वर्तमान क्षेत्र की भाषा के साथ ही अपने मूल देश की पुरातन भाषा में भी शपथ ली। न्यूलीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त मुक्तेश परदेशी ने डाॅ. गौरव शर्मा के इस कदम की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों का सम्मान बताया है।

डाॅ. गौरव ने इस संबंध में ट्विटर पर लिखा है कि माना जाता है कि दुनिया की सभी भाषाओं का जन्म संस्कृत से हुआ है। मैं उत्तर भारत की कई भाषाओं को जानता और समझता हूं। मैं किसी एक भाषा में शपथ लेता तो दूसरी भाषा के लोगों के साथ भेदभाव होता, इसलिए संस्कृत में भी शपथ ली।
उधर, इस संबंध मंे केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल का कहना है कि डाॅ. गौरव शर्मा का यह निर्णय अपने मूल देश के प्रति उनके प्रेम और अपनी पुरातन भाषा के प्रति उनकी श्रद्धा का द्योतक है। अपनी जड़ों से जुड़े रहने वाले लोग ही जीवन में प्रगति और प्रतिष्ठा हासिल करते हैं। डाॅ. गौरव का यह कदम करोड़ों भारतवासियों और अप्रवासी भारतीयों के लिए प्रेरणादायक है। हमारी देववाणी संस्कृत ने एक बार सात समुद्र पार अपना महत्त्व प्रतिपादित किया है। इस भाषा की समृद्धि और वैज्ञानिकता इसे अन्य भाषाओं से श्रेष्ठ बनाती है।