देहरादून, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के विवादास्पद प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी को पद से हटाने के आदेश जारी हो गये, इस आदेश के बाद सरकार के खिलाफ लंबे समय से आवाज बुलंद कर रहे ‘जन प्रहार’ संगठन की जीत के रुप में देखा जा रहा है। प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति शुरू से ही विवादों में घिरी थी। जब मामला नैनीताल उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायालय ने सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अवमानना प्रकरण की सुनवाई के दौरान सचिव स्तर पर जमकर फटकार लगी थी।
इसके बावजूद जब सरकार ने नियमों में बदलाव करके ध्यानी को पद पर बनाए रखने की कोशिश की, यहीं से ‘जन प्रहार’ ने पूरे मामले को जनता के बीच ले जाने की ठान ली थी।
जन प्रहार की संयोजक सुजाता पॉल के नेतृत्व में संगठन ने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं रहने दिया, बल्कि इसे पारदर्शिता बनाम कुशासन की लड़ाई का रूप दे दिया।
पहले पायदान में प्रेस वार्ताओं का दौर शुरू हुआ, जहां सहसंयोजक एवं अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कानूनी पेचीदगियों को आम जनता के सामने सरल भाषा में रखा। फिर प्रवक्ता रविंद्र सिंह गुसाईं ने सोशल मीडिया और पारंपरिक मीडिया दोनों पर ऐसा डटकर मोर्चा संभाला कि हर व्यक्ति इस मुद्दे को अपनी रोजमर्रा की चर्चा में शामिल करने को मजबूर हो गया। तीसरी पायदान में ज्ञापन और जनजागरण अभियान ने इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दे दिया।
प्रकाश चंद्र ध्यानी के हटने की पुष्टि होते ही जन प्रहार ने तुरंत एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे ऐतिहासिक जन-विजय बताया।
जन प्रहार की संयोजक सुजाता पाॕल ने कहा :
“यह केवल एक व्यक्ति को हटाने का मामला नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि जब न्यायपालिका अपनी गरिमा के साथ खड़ी होती है और जनता सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराती है, तो सरकार को झुकना ही पड़ता है। हम उत्तराखंड उच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिसने कानून की गरिमा को सर्वोपरि रखा।”



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