देहरादून, शहर की प्रमुख सड़कों में शामिल कैंट रोड को चौड़ा करने की सरकारी योजना का स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। प्रस्तावित परियोजना के तहत लगभग 250 पेड़ों को काटे जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी के विरोध में रविवार को सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सरकार से इस योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की। प्रदर्शन में स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने “पेड़ बचाओ-देहरादून बचाओ” जैसे नारों के साथ कैंट क्षेत्र में पैदल मार्च किया और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शहर में बढ़ते प्रदूषण और तापमान के बीच बड़े और पुराने पेड़ों की कटाई पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है। उनका तर्क है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन ऐसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए जिनसे पेड़ों को बचाया जा सके।
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए वैकल्पिक डिजाइन या रूट प्लान तैयार किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। उनका कहना है कि देहरादून की पहचान उसकी हरियाली से है और यदि इसी तरह पेड़ों की कटाई जारी रही तो शहर की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
गौरतलब हो कि 23 जून 2024 को दून के हजारों नागरिकों ने न्यू कैंट रोड चौड़ीकरण परियोजना के लिए प्रस्तावित लगभग 250 पेड़ों की कटाई के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए पदयात्रा की। इसके जवाब में, रातोंरात बैनर लगाए गए जिन पर लिखा था कि कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा और हमारे मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से नागरिकों को आश्वासन दिया कि शहर के हरित आवरण की रक्षा के लिए इस योजना को स्थगित कर दिया जाएगा।
लेकिन फिर से उसी कैंट रोड को चार लेन का बनाने की नई योजना बनाई जा रही है। जिसमें फिलहाल 17 पेड़ काटे जाएंगे। भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद, ‘विस्तार’ के नाम पर और भी कई पेड़ों की बलि दी जाएगी।
इसी को लेकर देहरादून के जागरूक नागरिकों ने 1 मार्च को ‘वादा याद दिलाओ’ पदयात्रा में भाग लिया ताकि हमारे जल, जंगल, जमीन की रक्षा की जा सके और हमारे नेताओं को उनके गंभीर वादों के प्रति जवाबदेह ठहराया जा सके। उनका मानना है कि यह अब केवल पेड़ों को बचाने का मामला नहीं है, यह हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई है, सभा को डॉ. रवि चोपड़ा, हिमांशु अरोड़ा, अनूप नौटियाल और ज्योत्सना ने संबोधित किया ।
‘वादा याद दिलाओ’ वॉक में भाग लेने वाले समूह थे।
अघास फाउंडेशन, बलभद्र खलंगा विकास समिति, बीटीडीटी, बीवीजेवाईएस, सिटिज़ब्स फॉर ग्रीन दून, देहरादून साइक्लिंग क्लब, डीसीए, इको ग्रुप, दून के मित्र, हिन्द स्वराज, इंसानियत मंच, एमएडी, मावेरिक्स, प्रकृति का साथी, पराशक्ति, पिंडरघाटी यौवन, प्रमुख, संयुक्त नागरिक संगठन, एसडीसी फाउंडेशन, एसएफआई, तितली भरोसा, बर्बाद योद्धा और उत्तराखंड महिला संगठन।



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