Tuesday, August 4, 2026
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गंगा जल से भोलेनाथ का अभिषेक करने से होती है पुण्य की प्राप्ती : प्रो. विष्णुदत्त राकेश

हरिद्वार  (कुलभूषण) श्रवण माह में गंगा जल से देवाधिदेव महादेव भगवान भोले शंकर के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। सावन माह भगवान भोले नाथ को विशेष प्रिय है।जिसके चलते शिवभक्त सावन मे कांवड मे गंगाजल ले जाकर भगवान भोलेनाथ का शिवालयों मे गंगा जल से अभिषेक कर उनकी आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करते है।
कांवड यात्रा के महत्व पर जानकारी देते हुये देश के जानेमाने हिन्दी साहित्य के विद्वान व गुरुकुल कांगडी समविश्विविधालय के सेवानिवृत संकायाध्यक्ष प्रो.विष्णुदत्त राकेश ने भेटवार्ता मे बताया कि हमारे शास्त्रों में कांवड यात्रा की शुरुआत का उल्लेख रामायण काल से मिलता है।जहां श्रवण कुमार अपने वृद्व माता -पिता को कांवड में बिठाकर तीर्थ यात्रा पर निकलते है।यही से कांवड यात्रा की शुरूआत मानी गयी है।
प्रो. राकेश कहते है की पूर्व में कांवड एक नाम बाहंगी प्रचलित था।जिसका सामान्यता प्रयोग राजपरिवार मे सामान लाने ले जाने के लिए किया जाता था। शिवाजी भी इसी बाहंगी मे छिपकर निकले थे।
तीर्थ यात्रा के क्षेत्र में बाहंगी को कांवड कहते है।जिसमें जल भरकर भक्तजन भगवान का जलाभिषेक करते है।

12वी शताब्दी मे एकनाथ नामक संत कांवड में गंगाजल लेकर रामेश्वरम गये व भगवान का अभिषेक किया। वही तुलसीदास रामायण मे कहते है की जब भगवान राम ने समुद्र के किनारे रामेश्वरम की स्थापना कर गंगा जल से पूजन किया तब गंगा जल के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा की जो मानव गंगाजल आन चढावे ते मानव मुक्ति पावे ।
प्रो.राकेश कहते है की वर्ष मे दो बार शिवरात्रि पर्व आता है। एक श्रवण मास की शिवरात्रि व फाल्गुन मास की शिवरात्रि दोनों में भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक का विशेष महत्व है।फाल्गुन मास की शिवरात्रि मे भगवान भोलेनाथ का विवाह संस्कार सम्पन्न हुआ था।
कांवड मास में गंगा नगरी में आने वाले शिवभक्तों की सेवा करने का अपना अलग स्थान है लोगों का मानना है की जो लोग कांवड नही ले जा पाते है।वह कांवड ले जाने वाले शिवभक्तों की सेवा कर पुण्य लाभ प्राप्त करते है।
बदलते समय के साथ साथ कांवड यात्रा मे भी बदलाव देखने को मिल रहा है। बदलते परिवेश मे बडी संख्या में डाक कांवड विशाल रूप लेती जा रही है।जिसमें बडी संख्या में युवा प्रतिभाग कर कम समय मे दुपहिया वाहनों से अपने अपने क्षेत्र के शिवालयों में पहुंच भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते है।

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