Saturday, April 25, 2026
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अंकिता हत्याकांड़ : वीआईपी कौन…? 8 फरवरी होगी महापंचायत, ‘गढ़रत्न’ नरेंद्र सिंह नेगी का समर्थन

देहरादून, अंकिता हत्याकांड़ को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के खिलाफ पूरे पहाड़ में आक्रोश के स्वर अभी शांत होते नहीं दिख रहे हैं, चाहे इस मामले में सरकार की ओर से सीबीआई जांच की संस्तुति हो चुकी हो, लेकिन न्याय की मांग को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन की गूंज लगातार सुनाई दे रही है और इसी क्रम में 8 फरवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में एक बड़ी महापंचायत आयोजित की जा रही है।
इस महापंचायत को उत्तराखंड के प्रतिष्ठित लोकगायक और ‘गढ़रत्न’ नरेंद्र सिंह नेगी का समर्थन मिला है। नेगी दा ने इसे केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि न्याय, अस्मिता और पहाड़ की बेटियों के सम्मान की लड़ाई बताते हुए आम जनता से इसमें बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है, दरअसल, अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से 8 फरवरी को परेड ग्राउंड में ‘वीआईपी कौन ? महापंचायत’ आयोजित की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका के खुलासे और दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग को मजबूती देना है। लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने इस महापंचायत के समर्थन में कहा कि यह संघर्ष पूरे उत्तराखंड की आत्मा और पहाड़ की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
लोक गायक नेगी ने जनता से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि आज अन्याय के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाले समय में पहाड़ की हर बेटी खुद को असुरक्षित महसूस करेगी।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक पीड़ित परिवार को पूरा न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिल जाती। उन्होंने बताया कि महापंचायत को सफल बनाने के लिए राज्यभर में जनसंपर्क और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। मोहित डिमरी ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को कमजोर करने के लिए इसे राजनीतिक रंग देने का नैरेटिव गढ़ रही है, जिससे जनता के बीच भ्रम फैलाया जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी बेटी के लिए न्याय की मांग करना गलत है। गौरतलब है कि 15 जनवरी को संघर्ष मंच ने शहीद स्मारक में बैठक कर महापंचायत की घोषणा की थी। उस बैठक में अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका उजागर करने और उसे संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई थी। मंच का कहना है कि जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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