नई दिल्ली, शुक्रवार को मॉनसून सत्र के पांचवें दिन संसद में बार-बार कार्यवाही स्थगित हुई और हंगामा हुआ। विपक्षी सांसद नीट पेपर ‘लीक’ मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर पूरी चर्चा की मांग कर रहे थे। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई और अब वे सोमवार सुबह 11 बजे फिर से मिलेंगे। वहीं, आज दोनों सदनों में कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
श्रद्धांजलि के बाद विपक्षी सदस्य नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर सोमवार को राजधानी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील करते हुए कहा कि प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। बाद में भी यह हंगामा जारी रहा जिसके बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
राज्यसभा की कार्यवाही
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले पर चर्चा करने की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों और इसका विरोध कर रहे सत्ता पक्ष के सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से आज भी उच्च सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाया। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे बैठक शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले पर चर्चा करने की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उप सभापति हरिवंश ने कहा कि राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन अधिनियम) विधेयक 2026 को पेश किया जाना है जो आज के कामकाज की सूची में सूचीबद्ध है। विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को वही वैधानिक संरक्षण प्रदान करना है, जो वर्तमान में राष्ट्र गान ‘जन गण मन को प्राप्त है। हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि चार दिन बीत चुके हैं और अभी तक कोई विधायी कामकाज नहीं हो पाया है।
उन्होंने गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन अधिनियम) विधेयक 2026 पेश करने को कहा। राय ने सदन में चर्चा करने और पारित करने के लिए यह विधेयक पेश किया। विपक्षी सदस्यों, विशेषकर वाम दलों के सदस्यों ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया। हालांकि, ध्वनिमत से इस विधेयक को सदन में पेश कर दिया गया। इसके बाद उपसभापति ने विधेयक पर चर्चा शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।


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