Friday, July 17, 2026
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टीईटी अनिवार्यता के विरुद्ध एंव पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर शिक्षकों का धरना

रुद्रप्रयाग – उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद रूद्रप्रयाग के द्वारा अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्देशानुसार उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर एसोसिएशन (उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ) उत्तराखंड की प्रान्तीय तदर्थ समिति के आवाह्न पर आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने व पदोन्नति हेतु टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने व पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के तहत आज जिला मुख्यालय रूद्रप्रयाग में धरना देकर जिला अधिकारी महोदय रूद्रप्रयाग के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री व शिक्षामंत्री भारत सरकार को ज्ञापन सौंपा गया। कानून में तुरंत संसोधन कर आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने व पुरानी पेंशन बहाल करने करने की प्रमुख दो सूत्रीय मांग की गई। मांगें पूरी न होने पर आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में विधानसभा घेराव करेंगे और माननीयों तक अपनी बात पंहुचाई जाएगी। इसके पश्चात् भी अगर सरकार से शिक्षकों को न्याय नहीं मिला तो संसद के आगामी मानसून सत्र में पूरे देश के शिक्षकों के साथ संसद घेराव किया जाएगा। वक्ताओं द्वारा कहा गया कि आरटीई कानून 2009 जिसमें शिक्षक बनने की पात्रता परीक्षा के रूप में टीईटी को अनिवार्य अहर्ता के रूप में रखा गया था, में वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा 2017 में संशोधन कर कार्यरत सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता का काला कानून थोपा गया है। आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक भी समय-समय एनसीटीई व राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अर्हताएं पूर्ण कर ही सेवा में आए हैं। कोई भी कानून जब पास होता है तो वह उसके बाद वालों पर लागू होता है। आरटीई अधिनियम 2009 के तहत एनसीटीई द्वारा टीईटी को नियुक्ति की पात्रता के रूप में अंगीकृत किया गया है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद सभी शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी के आधार पर ही हो रही हैं।2017 में कानून में बदलाव कर इसे पूर्व से नियुक्त सभी शिक्षकों पर थोप कर भूतल्क्षित तिथि से लागू करना स्वयं में स्थापित कानूनों के विपरित है।
इस अवसर पर संगठन के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने कहा कि आरटीई अधिनियम 2009 में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु टीईटी एक पात्रता परीक्षा के रूप में निर्धारित की गई थी। जिसे राज्यों द्वारा अलग-अलग समय से इसे लागू किया गया।यहां तक कि आरटीई अधिनियम पारित होने से पूर्व जारी नियुक्ति की विज्ञप्तियों पर की गई नियुक्तियां भी टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रही हैं। सीधी सी बात है कि खेल के बीच में कोई नियम नहीं बदले जाते हैं। बदलाव अगले मैच से प्रभावी होते हैं। शिक्षक टीईटी परीक्षा देने व उसे पास करने से नहीं घबरा रहें हैं, कानून बनने से पहले वालों पर भूतल्क्षित तिथि से उसे लागू करना स्वयं स्थापित कानूनों के हिसाब से उचित नहीं है। गलत को शिक्षक स्वीकार नहीं कर सकते। पुरानी पेंशन समाप्त करने पर श्री झिंक्वाण ने कहा कि हमने इतिहास में पढ़ा है और पढ़ाया है,कि अंग्रेजों ने नाना साहब की पेंशन बंद कर दी थी तो उन्हें देर सबेर जाना पड़ा है। बरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित काला ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा 2017 में आरटीई कानून में संशोधन कर इसे पूर्व से कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने व पदोन्नति हेतु टीईटी की अनिवार्य कर शिक्षकों के लिए एक अलग से नियम बनाया गया है, जो कि एक धोखा है, दशकों पुरानी लम्बी-लम्बी सेवा के बाद उन्हें पात्रता परीक्षा के लिए बाध्य करना न्याय संगत नहीं कहा जा सकता है। सेवा के मध्य उस पद की नियुक्ति की अहर्ता वाली किसी भी परीक्षा को शिक्षक स्वीकार नहीं करेंगे।जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि सेवा में बने रहने व पदोन्नति हेतु अन्य किसी भी प्रकार की सेवावों के लिए बीच में कोई पात्रता परीक्षा की बाध्यता पूरे ही देश में नहीं है। केवल शिक्षकों के लिए ऐसा काला कानून आखिर क्यों। पूर्व प्रान्तीय प्रवक्ता एवं वर्तमान प्रान्तीय तदर्थ समिति के सदस्य बीरेंद्र कठैत ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ लम्बे समय से लगातार,अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों और कार्मिकों को पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग करते आ रहा है। प्राथमिक शिक्षक संघ पूर्व में भी कई-कई बार राष्ट्रव्यापी एवं राज्यव्यापी आंदोलन कर चुका है, लेकिन सरकार मांगों को अनसूना कर रही है। ऊपर से अब आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता को लागू कर शिक्षकों को समाज में लज्जित करने व उनकी योग्यता पर प्रश्न चिन्ह लगाने का कृत्य कर रही है, जबकि इन्हीं शिक्षकों के पढ़ाए छात्र आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र सेवा कर देश की तरक्की में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।आंदोलन शिक्षकों के लिए एक बहुत अप्रिय कदम है, वह जी जान से अपने छात्रों के बीच रहकर उन्हें सफल नागरिक बनाने में अपना सबकुछ झोंक देता है। लेकिन सरकार बीच-बीच में ऐसे फरमान जारी कर हमें आंदोलन के लिए बाध्य करती है। शिक्षकों द्वारा जनपद मुख्यालय पर एक दिवसीय सांकेतिक धरने के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री व शिक्षामंत्री भारत सरकार को भेजे गए ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को सेवा में बने रहने व पदोन्नति हेतु टीईटी की अनिवार्यता से मुक्ति रखने व 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों- कर्मचारियों को पुरानी पेंशन वहाल करते हुए सेवानिवृत्ति के बाद उनके आर्थिक व सामाजिक भविष्य को सुरक्षित रखते हुए सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिया जाय।मांगें पूरी होने तक आंदोलन को एक जुटता के साथ आगे भी जारी रखा जाएगा।
धरने का नेतृत्व प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपदीय अध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने और संचालन जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट जी द्वारा किया गया। धरने में प्रान्तीय तदर्थ समिति के सदस्य बीरेंद्र कठैत, जनपदीय बरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित काला, जिला उपाध्यक्ष त्रिलोक सिंह रावत, मनोज शर्मा,क्षेत्रीय शाखा अध्यक्ष विजयराम गोस्वामी, अनूप नेगी, अरविंद सकलानी,शिव प्रसाद भट्ट, चारू चन्द्र खण्डूरी, लक्ष्मी नेगी ने किया। बैठक में रधुबीर बुटोला, बीना पंवार, शिव प्रसाद पुजारी, दिनेश राणा,गोदाम्भरी बिंदोला, त्रिलोक बिष्ट,कविन्द्र थपलियाल,देवेन्द्र बजवाल, राकेश नैनवाल, जाकिर हुसैन, मानवेन्द्र सिंह, अवतार सिंह राजपूत,राम सिंह राणा, रमेश शाह सहित जनपदीय व क्षेत्रीय शाखाओं के पदाधिकारी तथा जनपद के कोने कोने से आए शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दी।

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