Saturday, May 2, 2026
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गुरु नानक 5th सेंटेनरी स्कूल में तीन दिन तक चला अध्यात्म का उत्सव; सुखमनी साहिब पाठ और लंगर सेवा से गूंजा परिसर

मसूरी (दीपक सक्सेना ) गत वर्ष की भांति इस वर्ष गुरु नानक 5th सेंटेनरी स्कूल में दिनांक 24 अप्रैल से 26 अप्रैल तक एक भव्य समागम का आयोजन किया गया ।समागम के प्रथम दिन का शुभारंभ ‘सुखमनी साहिब’के पाठ से हुआ। पाठ के उपरांत विद्यालय के शिक्षक तथा शिक्षिकाओं ने ‘मिल मेरे प्रीतमा जिओ’ शबद का गायन किया। जिससे सभागार का संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और शांतिपूर्ण बन गया। प्रसाद वितरण तथा लंगर के साथ ही प्रथम दिवस का कार्यक्रम भाई गुरशरण जी के सानिध्य में संपन्न हुआ।
दूसरे दिन का कार्यक्रम अमृतवेला में सिमरन साधना से
आशीर्वादी भूमिका निभाते हुए अपने अमूल्य वचनो से तथा जाप के प्रत्येकस्वर में भक्ति,समर्पणऔरआध्यात्मिक ऊर्जा का अदभुत समन्वय से सम्पूर्ण सभागार ईश्वरके नाम में लीन हो गया।भाई मनजोत सिंह ने की। मध्याह्न 2:00 बजे दिन की दूसरी सभा मूलमंत्र जप तप का कार्यक्रम भाई गुरशरण जी के प्रेरणादाई सानिध्य में आयोजित हुआ। गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल शांग्रीला के सभागार में इस विशेष आयोजन में सम्मिलित होने के लिए छात्र-छात्राओं एवं श्रद्धालु संगत में अपना-अपना स्थान ग्रहण किया । आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत वातावरण में कार्यक्रम का आरंभ हुआ। गुरु ग्रंथ साहिब की छत्र-छाया में सर्वप्रथम गुरमत प्रचारक, पवित्रता, शांति और आध्यात्मिक समृद्धि के स्वरूप भाई गुरशरण जी ने अपने जत्थे के साथ विद्यालय परिसर में प्रवेश किया। जहां भाई गुरशरण जी का स्वागत गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल समिति के सचिव सरदार एम .पी. सिंह जी, गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल के प्रबंध समिति के सदस्या सरदारनी जैस्मीन कौर जी, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अनिल तिवारी जी, हेड मास्टर श्री कुलदीप सिंह त्यागी जी तथा गुरु नानक फिफ्थ सेंटेनरी स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी सुनील बक्शी जी, सरदार परमजीत सिंह सरदारनी गुरिंदर कौर और मसूरी निगम के पूर्व अध्यक्ष तथा मसूरी और देहरादून के अन्य स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने किया। स्वागत समारोह में विद्यालय के कर्मचारी गण तथा छात्र भी सम्मिलित हुए।
भाई गुरशरण सिंह जी ने अपने प्रवचन में प्रेम, शांति और भाईचारे का अद्भुत संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सच्ची आराधना किसी एक पूजा पद्धति में नहीं होती बल्कि अच्छे विचारों और अच्छे कर्मों से होती है। यह समागम केवल एक कार्यक्रम नहीं वरन् आत्मा को शांति देने वाला तथा जीवन को दिशा देने वाला एक आध्यात्मिक संगम है। हमें यह याद रखना चाहिए कि वास्तविक खुशी बाहर की वस्तुओं में नहीं वरन हमारे विचारों और कर्मों में होती है।
भाई गुरशरण जी ने ‘चौपई साहब’ की बानी, जो गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा रचित पांच बनियों में से एक है की महत्वता ,अखंड परमात्मा की समस्त शक्ति के सम्मुख नमन किया तथा समस्त मानव प्राणों की रक्षा की प्रार्थना की। अंत में ‘चौपई साहिब’ के पाठ की अरदास की गई। ‘अनंद साहिब’का पाठ किया गया। प्रसाद वितरण किया गया । लंगर की सेवा की गई जो मानवता की सेवा के साथ-साथ पूजा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तत्पश्चात सभी ने प्रस्थान किया।
तीसरे दिन संपूर्ण शांति एवं निर्मल वातावरण में जब तक साधना का आरंभ हुआ । भाई गुरशरण जी की उपस्थिति तथा उनके अमृत स्वर ब्रह्म मुहूर्त में एक सात्विक आभा वातावरण में विकीर्ण कर रहे थे। दो-तीन घंटे तक शुद्ध एवं सात्विक वातावरण में विचरण करते ध्यान साधना का कार्यक्रम संपन्न हुआ। भाई गुरशरण जी ने गुरमत विचार प्रकट करते हुए कहा कि मनुष्य का जन्म ही अपने धर्म का पालन करते हुए ,जप तप करके सेवा और सिमरन करते हुए ईश्वर की प्राप्ति के लिए होता है। मनुष्य के जीवन का यह परम लक्ष्य होना चाहिए कि वह अपने जीवन में ईश्वर की आराधना करता रहे। गुरबानी का पाठ करता रहे तथा ईश्वर का स्मरण करता रहे। सिमरन करता रहे । गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल के सचिव सरदार एम. पी. सिंह जी ने तथा सरदारनी जसवीर कौर जी ने भाई को गुरशरण जी को स्मृति चिन्ह ,दुशाला भेंट करके उनका सम्मान किया तथा समस्त जत्थे के प्रत्येक सदस्य को एक-एक स्मृति चिन्ह भेंट स्वरूप प्रदान किया । कार्यक्रम के अंत में ‘अनंद साहिब’ का पाठ किया गया। अरदास की गई तथा हुकुम नाम लिया गया। प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल की समिति के सचिव सरदार एम. पी. सिंह जी ने सभागार में उपस्थित अतिथियों सहयोगकर्ताओं तथा संगत के प्रति आभार व्यक्त किया। सभी के अमूल्य सहयोग और सहभागिता की सराहना की एवं मुख्य अतिथि तथा अन्य गण मन व्यक्तियों को धन्यवाद व्यापित ज्ञापित किया।
समागम की इस पावन बेला पर अपनी मधुर स्मृतियों को समेटते और सहजते हुए ज्ञान ,भक्ति और सद्भावना से ओत-प्रोत होते हुए समागम की समस्त सीखों को अपने आचरण में उतारने का प्रण लेकर सारी संगतने अपने अपने गन्तव्य की ओर प्रस्थान किया।

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