-बैकफुट पर सरकार, बीच का रास्ता तलाशने की कोशिश में जुटी
-एबीवीपी ने की यूजीसी नियमों में बदलाव की मांग
नई दिल्ली (एजेन्सी), यूजीसी नियमों के भेदभावपूर्ण प्रावधानों के खिलाफ सामान्य वर्ग के छात्रों का गुस्सा देख सरकार बैकफुट पर है। सरकार बीच का रास्ता तलाशने की कोशिश में जुट गई है। इसके लिए उसने सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आगे किया। प्रधान ने लोगों को आश्वस्त किया है कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं होने पाएगा। लेकिन छात्र शिक्षा मंत्री के बयान से संतुष्ट नहीं हैं। वे इसके लिए नियमों में स्पष्ट प्रावधान चाहते हैं।
यूजीसी कानूनों का एससी-एसटी एक्ट की तरह दुरुपयोग होने और इससे सामान्य वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों के फंसने की आशंकाओं को देखते हुए अब भाजपा और उसके अनुषांगिक संगठनों में भी इसका विरोध बढ़ रहा है।
लखनऊ में भाजपा के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा देकर यूजीसी नियमों के खिलाफ अपना रोष जताया है। माना जा रहा है कि जल्द ही भाजपा के कुछ बड़े ब्राह्मण नेता सामने आकर विरोध की कमान को संभाल सकते हैं।
भाजपा का छात्र संगठन एबीवीपी भी खुलकर यूजीसी नियमों के विरोध में आ गया है। एक बयान जारी कर एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डा. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि यूजीसी के विवादित नियमों में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी अधिसूचना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 का उद्देश्य सही है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों की चिंताओं को देखते हुए इसमें बदलाव की आवश्यकता है।
एबीवीपी नेता ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार होना चाहिए। यूजीसी के नियमों में अस्पष्टता के कारण लोगों में भ्रांति बढ़ी है। यूजीसी को इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए तत्काल उपाय करना चाहिए।



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