Thursday, June 4, 2026
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जयंती पर याद किये गए महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल

नई दिल्ली, गढ़वाली के महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल को उनकी 92 वीं जयंती पर याद किया गया। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा गढ़वाल भवन में आयोजित जयंती समारोह में महाकवि डंडरियाल के व्यक्तित्व व साहित्य संसार पर चर्चा की गयी। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने कहा कि मंच वर्ष 2012 से डंडरियाल साहित्य सम्मान प्रदान करता आ रहा है साथ ही नई पीढ़ी को गढ़वाली, कुमाउनी भाषा सिखाने के कक्षाओं का आयोजन करता रहता है। श्री ध्यानी ने कहा युवा साहित्यकार आशीष सुंदरियाल डंडरियाल जी के अप्रकाशित साहित्य को प्रकाशित करने का काम कर रहे हैं। आज कई लोग डंडरियाल जी के साहित्य पर शोध कर रहे हैं।
डीपीएमआई के चेयरमैन व उत्तराखण्ड लोक-भाषा दिल्लीडॉ विनोद बछेती ने कहा कि हमें नई पीढ़ी को भी अपने साहित्य समाज से जोड़ना होगा। उत्तराखण्ड लोक-भाषा दिल्ली द्वारा भाषा शिक्षण कक्षाओं का आयोजन इस दिशा में बहुत उपयोगी है। अन्य वक्ताओं में उत्तराखण्ड के पूर्व राज्यमंत्री धीरेन्द्र प्रताप, बरिष्ठ साहित्यकार नेत्र सिंह असवाल, बरिष्ठ समाजसेवी भाष्करानन्द कुकरेती, लेखिका डॉ. हेमा उनियाल, वरिष्ठ कत्थक नृत्यकार व गायक जगदीश ढौंडियाल, बरिष्ठ पत्रकार श्रीमती सुषमा जुगरान ध्यानी, चारु तिवारी, बरिष्ठ रंगकर्मी खुशहाल सिंह बिष्ट, बरिष्ठ साहित्यकार रमेश चंद्र घिल्डियाल सरस, जयपाल सिंह रावत, दर्शन सिंह रावत, बरिष्ठ समाजसेवी दिगमोहन सिंह नेगी, हरिकृष्ण डंडरियाल, दिनेश ध्यानी आदि ने अपने विचार रखे। समारोह में उपस्थित कवियों ने डंडरियाल जी की कविताओं का पाठ भी किया। समारोह में कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने दो प्रस्ताव रखे जिन्हें ध्वनिमत से किया गया । पहला प्रस्ताव भारत सरकार से मांग की गयी की गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाये व दूसरा उत्तराखण्ड सरकार उत्तराखण्ड में गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी का गठन करे व गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु विधानसभा में प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार को भेजे। जिससे गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा सके। श्री ध्यानी ने कहा कि जब उत्तराखण्ड में हिंदी, संस्कृत, उर्दू, पंजाबी अकादमी हैं और उत्तराखण्ड भाषा संस्थान भी इन भाषाओं के लिए काम कर रहा है तो फिर गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं के लिए अलग से अकादमी क्यों नहीं है ? इस प्रकार का सौतेला व्यवहार उचित नहीं है।
इस मौके पर कवितापाठ करने वाले कवियों में चन्दन प्रेमी, भगवती जुयाल गढ़देशी, रमेश चन्द्र घिल्डियाल सरस, जबर सिंह कैंतुरा, जगमोहन सिंह रावत जगमोरा, सुशील बुड़ाकोटी, बजमोहन वेदवाल, निर्मला नेगी, शशि बडोला, जय सिंह रावत, नीरज बवाड़ी, , उमेश चन्द्र बन्दूणी, डॉ पृथ्वी सिंह केदारखण्डी , डॉ कुसुम भट्ट, दीवान सिंह नेगी रिंगूण, रोशन लाल हिंद कवि, ओमप्रकाश ध्यानी, बृजमोहन वेदवाल, संदीप गढ़वाली, आदि कवियों कवियों ने कवितापाठ किया ।
समारोह में उपस्थित लोगों में सर्वश्री जगदीश ढौंडियाल, डॉ हेमा उनियाल, रघुनन्दन उनियाल, डॉ. विनोद बछेती, ममता रावत, सुषमा जुगरान ध्यानी, दर्शन सिंह रावत, बृजमोहन वेदवाल,खुशहाल सिंह बिष्ट, नेत्र सिंह असवाल, शशि बडोला, जयपाल सिंह रावत जय सिंह रावत, दिगमोहन नेगी, मोहन चन्द्र पांथरी, सीमा गुसाईं, नीरज बवाड़ी, विकास चमोली,हरिकृष्ण डंडरियाल, भास्करानंद कुकरेती, रविन्द्र गुडियाल, चारु तिवारी, दीवान सिंह नेगी रिंगूण, युगराज सिंह रावत, गोविंदराम भट्ट, जगमोहन रावत जगमोरा, संजय बोरा, रोशन लाल हिंदकवि, चन्दन प्रेमी, उमेश बंदूनी , डॉ कुसुम भट्ट, ओमप्रकाश ध्यानी, सुशील बुड़ाकोटी, विजयलक्ष्मी नौटियाल, ऋषिकांत ममगाईं, रामपाल किमली, प्रताप थलवाल, रेनू उनियाल, महिपाल सिंह असवाल, जबर सिंह कैंतुरा, सुशील डंडरियाल, धीरेन्द्र प्रताप, कमलेश, मुकेश, मथुरा प्रसाद थपलियाल, प्रदीप तिवारी, माता देवी तिवारी, शशि बडोला, डॉ पृथ्वी सिंह केदारखण्डी, मान सिंह घुघतियाल अर वीरेन्द्र सिंह रावत आदि लोग उपस्थित उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन बरिष्ठ रंगकर्मी बृजमोहन वेदवाल व दिनेश ध्यानी ने किया।

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