हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी (सम विश्वविद्यालय) के संस्कृत विभाग में “आर्ष भारत पुनर्जागरण के नायक: महर्षि दयानन्द सरस्वती” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दयानन्द सभागार में किया गया।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने “वेदों की ओर लौट चलो” का नारा देकर समाज में चेतना का संचार किया। उन्होंने भारतीय समाज को अंधविश्वासों से मुक्त कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी। स्वामी दयानन्द का देश की आज़ादी और सामाजिक सुधारों में विशेष योगदान रहा है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. हेमलता कृष्णमूर्ति ने की। उन्होंने कहा कि देश को आर्य बनाने का कार्य करना चाहिए और अविद्या को दूर कर समाज को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करना ही सच्ची आर्य सेवा है।
मुख्य वक्ता प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने “भारत पुनर्जागरण के नायक महर्षि दयानन्द सरस्वती” विषय पर विशेष व्याख्यान देते हुए बताया कि महर्षि दयानन्द ने भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने का कार्य किया और आधुनिक भारत के बौद्धिक पुनर्जागरण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. ब्रह्मदेव ने कहा कि संगोष्ठी को सफल बनाने में सभी अध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का सराहनीय योगदान रहा।
कार्यक्रम में प्रो. अंजली गोयल ने कहा कि महर्षि दयानन्द के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं; उनके सिद्धांतों को अपनाकर ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है।
संगोष्ठी के समापन सत्र में अतिथियों का सम्मान किया गया और धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत विभाग की ओर से प्रस्तुत किया गया।



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