(दिनेश ध्यानी)
कहते हैं कि कोई अगर ठान ले और लगन से काम में जुट जाए तो दुनियां में कोई भी काम असंभव नहीं है। यही उक्ति चरितार्थ की है उत्तराखंड के टिहरी जनपद की श्रेष्ठा नेगी ने।
जिसने मई 2025 में चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा पास करके सफलता हासिल की। वह मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के डाबरी गांव, जुआ पट्टी, थौलधार ब्लॉक की रहने वाली है और वर्तमान में उनका परिवार 5 दशक से दिल्ली में ही सेटल्ड है। श्रेष्ठा नेगी बचपन से ही पढ़ाई में अब्बल रहती थी। वर्तमान में वे दक्षिणी दिल्ली के आरपीएस कॉलोनी खानपुर में रहते हैं। श्रेष्ठा नेगी का परिवार सादा जीवन उच्च विचार को मानता है। उनके पिताजी विक्रम सिंह नेगी एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं और उनकी माताजी निर्मला नेगी एक शिक्षिका, लेखिका और समाजसेवी हैं। श्रेष्ठा का संबंध एक शिक्षित परिवार से है। उनके दादाजी स्वर्गीय श्री यशपाल सिंह नेगी जी ने सन् 1958 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया था और भारत सरकार के मंत्रालय में राजपत्रित अधिकारी से सेवानिवृत थे। उनके नानाजी स्वर्गीय श्री अवतार सिंह नेगी जी मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस में सैन्य अधिकारी (आर्मी ऑफिसर)थे। श्रेष्ठा की विद्यालयी शिक्षा एईएस पुष्प विहार से हुई, वह विद्यालय में हमेशा मेधावी छात्रा रही हैं। 10th में 10 सीजीपीए और 12वीं में 93.6 प्रतिशत अंक हासिल करके टॉपर रही हैं। उसके बाद उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स किया। श्रेष्ठा नेगी मृदुभाषी, सौम्य सरल स्वभाव की एवं व्यवहार कुशल होने के कारण सभी की प्रिय हैं। उन्होंने सीए फाउंडेशन में ऑल इंडिया रैंक 43 हासिल की, इंटर में एक्जेम्प्शन पाकर सीए फाइनल 2025 में पास की। अपने इंटर्नशिप प्रथम वर्ष ‘अर्नस एंड यंग’ बिग फाॅर से इंडायरेक्ट टैक्स में और फिर केपीएमजी में एम एंड ए टैक्स (मर्जस एंड ऐक्वीजिसन) में की। वर्तमान में भी वह केपीएमजी में कार्यरत हैं। पढ़ाई के अलावा उन्हें संगीत और लेखन में भी रुचि है।
उनकी सफलता का श्रेय उनकी लगन, कठिन परिश्रम, घंटों पढने को जाता है। पढ़ाई के दौरान दोस्तों, परिवार, सोशल मीडिया से दूर रहना, मार्गदर्शक के रूप में उनके शिक्षकों और वरिष्ठ सहयोगियों, टीम का सहयोग सभी को जाता है क्योंकि सर्विस के साथ-साथ पढ़ना बड़ा मुश्किल होता है। अपनी सफलता पर श्रेष्ठा कहती हैं कि उन्हें विश्वास था कि वह सफल हो जाएंगी लेकिन मन में भय बना ही रहता था। जब सीए फाइनल का रिजल्ट आया तो श्रेष्ठा के साथ-साथ मां के भी खुशी के आंसू छलक पड़े कि आज बेटी की सफलता से सपने पूरे हुए हैं। बच्चों की सफलता पर ही मां-बाप की असली पूंजी होती है और बच्चों की खुशी से बढ़कर कुछ भी नहीं होता है। श्रेष्ठा अपने परिवार में पहली सीए बनी हैं। इस बारे में उनकी माता जी श्रीमती निर्मला नेगी जो की स्वयं एक अध्यापिका हैं उनका कहना है कि कॉमर्स स्ट्रीम की हमें जानकारी नहीं थी तो मैंने तीन चार क्वालिफाइड सीए से पूछा कि श्रेष्ठा सीए करना चाहती है उन्होंने बड़े सकारात्मक रूप में कहा कि वह कर लेगी और कभी किसी भी मार्गदर्शन की जरूरत हो तो बेझिझक पूछ सकती है और यह सुनकर मुझे बड़ा आश्वासन मिला। उन सभी लोगों का हार्दिक धन्यवाद। बस यहीं से बेटी की लगन को आकर देने का विचार परिपक्व हुआ और आज सच में बेटी ने हमारे सपने को पूरा कर दिया।
श्रेष्ठा नेगी को सब तरफ से बधाई व शुभकमाना सन्देश मिल रहे हैं। खासकर परिजनों से और इसी कड़ी में श्रेष्ठा की सफलता पर 12 जुलाई 2025 को ‘गांधी शांति प्रतिष्ठान’ नई दिल्ली में मासिक गोष्ठी में गढ़वाली भाषा के प्रथम पजलकार एवं साहित्यकार जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ जी ने उन्हें “कुसुम जगमोरा” प्रोत्साहन सम्मान से सम्मानित किया, जिसमें प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र और नकद राशि भेंट की गई। इस अवसर पर डॉ हेमा उनियाल, यशोदा घिल्डियाल, कुसुम बिष्ट, निर्मला नेगी, शकुंतला जोशी, डॉ रामेश्वरी नादान, सीमा नेगी भैंसोड़ा, अनिल पंत, प्रताप सिंह थलवाल, सतीश रावत, खजान दत्त शर्मा, दीवान सिंह नेगी, युगराज सिंह रावत, नागेंद्र सिंह रावत, दयाल सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह रावत, उमेश चन्द्र बंदूणी, ओम ध्यानी, शशि बडोला, देवेंद्र सिंह गुसाईं, कैलाश कुकरेती, अनूप रावत, रविंद्र कंडारी इत्यादि उपस्थित रहे।उपस्थित थे। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने भी श्रेष्ठा नेगी को बधाई दी व कहा की श्रेष्ठा नेगी ने बता दिया है कि हमारी बेटियाँ किसी से भी कम नहीं हैं। बस जरुरत है उनके सपनो को पंख देने की जो कि श्रेष्ठा की माता जी श्रीमती निर्मला नेगी व उनके पिताजी ने बाखूबी किया।


Recent Comments