स्वदेशी मेला का तीसरा दिन, आकर्षण का केन्द्र बनेहुये हैं स्वदेशी उत्पाद, केबिनेट मंत्री चुफाल ने भी की मेले में शिरकत

स्वदेशी की भावना को मजबूत करना ही मेले का मुख्य उद्देश्य : संयोजक सुरेन्द्र जी

देहरादून, लोकल फॉर वोकल के चाहने वालों के लिए इन दिनों पसंदीदा जगह बनी है राजधानी में आयोजित स्वदेशी मेला | पर्वतीय उत्पादों और स्थानीय कारीगरी के मुरीदों की चाहत उन्हें स्वदेशी जागरण मंच में लगे एक से बढ़कर एक स्टालों तक खींच ला रही है | मेले में आए दर्शकों के लिए उत्तरखंडी सभ्यता और खानपान से लबरेज दिन रंगीन सांस्कृतिक शामों में ढल जाते हैं |

आज के मुख्य अथिति के रुप में काबीना मंत्री विशन सिंह चुफाल ने मेले में शिरकत की । इस मौके पर उन्होंने लोगों को स्थानीय उत्पादों और लोक कला संस्कृति को बढावा देने के लिये सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी, स्वदेशी जागरण मंच द्वारा रिंग रोड, नेहरुग्राम में आयोजित इस स्वदेशी मेले के तीसरे दिन भी लोगों में जबरदस्त उत्साह बरकरार है | इस मेले की स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाली पीएम मोदी की लोकल फॉर वोकल थीम को स्पष्ट देखा जा सकता है | चाहे वह स्थानीय कृषि उत्पादों से जुड़े स्टॉल हों, चाहे स्थानीय कारीगरों के हुनर प्रदर्शित करती दुकाने, चाहे देवभूमि के समृद्ध खान-पान के आयोजन हों या चाहे लोक कलाकारों के परफ़ोर्मेंस से उजली शाम…….मेले का पल-पल और कोना-कोना स्वदेशी विचारों को प्रदर्शित कर रहा है | मेले में पहुँचने वाले दर्शकों के लिए यहाँ लगे विभिन्न सरकारी विभागों और एनजीओ के 150 से अधिक स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं |

मेले देखने आए लोगों का कहना है कि स्वदेशी मेले का यह अनुभव लंबे कोरोना के बाद बेहद सुखद और आनंददायक साबित हो रहा है | उनके लिए सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र है पहाड़ी खाद्य उत्पाद और कारीगरी के स्टॉल | मेले में बच्चे विभिन्न तरह के झूलों के अलावा ऊंट की सवारी और रोबोटिक ड्रैगन का आनंद उठा रहे हैं | स्वदेशी जागरण मंच के प्रदेश संयोजक सुरेन्द्र जी का कहना है कि हमारी कोशिश है मेले के माध्यम से स्वदेशी की भावना को मजबूत करना | हमारी अपील है कि मेलों से बाहर भी स्थानीय संस्कृति और सभ्यता से जुड़े सभी कलाकारों, उत्पादनकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते रहना चाहिए |
मेले में उद्योग विभाग, ग्राम्य विभाग, टीएचडीसी, रेल विभाग व तमाम एनजीओ के 150 से अधिक स्टालों पर स्थानीय उत्पादों, सांस्कृतिक कलाकृतियों, खानपान एवं वस्त्रों को प्रदर्शित किया गया | दर्शकों के मनोरंजन के लिए आज कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कई नामी कवियों ने अपना काव्य पाठ किया | मेले में मुख्य तौर पर स्वदेशी जागरण मंच प्रदेश संयोजक सुरेन्द्र जी, प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह नेगी, मेला संयोजक इन्द्रमणि गेरोला, मेला संरक्षक विशम्बर नाथ बजाज, मेला स्वागत समिति अध्यक्ष राजकुमार, संरक्षक स्वदेशी जागरण मंच जे एस वारने, मेला व्यवस्थापक प्रिंस यादव, मेला प्रचार प्रमुख आधार वर्मा, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख मधु जैन ने भाग लिया |

 

प्रयागराज से गंगा सागर, गौमुख से ऋषिकेश और फिर प्रयागराज में समापन

ऋषिकेश, नीलकंठ गंगा परिक्रमा पदयात्रा के प्रमुख संचालन कर्ता रिटायर्ड इन्डियन आर्मी ऑफिसर आर. पी. पान्डे और अहमदाबाद, गुजरात के हिरेन पटेल के मार्गदर्शन और सान्निध्य में आरम्भ हुई पदयात्रा आज परमार्थ निकेतन पहुंची।

 

आर. पी. पान्डे ने यात्रा के उद्देश्य के बारे में कहा कि माँ गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण के प्रति जनसमुदाय को जागृत करने तथा विशेष कर युवाओं को नदियों और जल स्रोतों को स्वच्छ बनाये रखने के बारे में जागृत करने के लिये इस पदयात्रा का शुभारम्भ किया गया है

आर. पी. पान्डे ने यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताते हुये कहा कि माँ गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण के प्रति जनसमुदाय को जागृत करने तथा विशेष कर युवाओं को नदियों और जल स्रोतों को स्वच्छ बनाये रखने के बारे में जागृत करने के लिये इस पदयात्रा का शुभारम्भ किया गया है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस यात्रा के सफल होने की शुभकामनायें देते हुये कहा कि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और पतन के अध्यायों में वहां की नदियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। राष्ट्र की समृद्धि में नदियों का महत्वपूर्ण योगदान है और माँ गंगा ने तो अपने प्रवाह में अनेकों युगों की दास्तान को सहेज कर रखा है। वैसे नदियां तो पूरे विश्व में है परन्तु गंगोत्री, उत्तराखण्ड से निकलने वाली गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि माँ है।
माँ गंगा करोड़ों लोगों की आस्था, दुःख, दर्द, प्रार्थना और कामनाओं को लेकर वह कलकल करती अथाह जल राशि लिये गंगा सागर में समाहित हो जाती है। न जाने कितना जप, तप, वेद मंत्रांे का गायन पूजा और प्रार्थना गंगा जी के तटों पर हुआ होगा। गंगा के जल मंे बैक्टीरियोफेज तो होता ही है साथ ही कई वर्षो से जपे गये मंत्रों और प्रार्थना की जो शक्ति है वह अद्भुत है। माँ गंगा के दर्शन मात्र से ही मन को शान्ति मिलती है। विश्व की वह पहली नदी है जिसके तटों पर अस्त होते सूर्य के साथ जय गंगे माता का स्वर गूंजने लगता है। भारत की पहचान है माँ गंगा। माँ गंगा ने पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों को जन्म तो नहीं दिया परन्तु जीवन अवश्य दिया है। भारत की राष्ट्रीय नदी गंगा युगोेें युगों से मानवीय चेतना का संचार कर रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरूदण्ड और भारतीय आध्यात्म का सार है गंगा इसलिये माँ गंगा को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाये रखना हम सभी का परम कर्तव्य है।

रिटायर्ड इन्डियन आर्मी ऑफिसर आर. पी. पान्डे ने बताया कि गंगा परिक्रमा पदयात्रा प्रयागराज से 16 दिसम्बर, 2020 से आरम्भ हुयी थी। प्रयागराज से गंगासागर तक यात्रा की पश्चात हम गंगोत्री, गोमुख, देवप्रयाग, ऋषिकेश से होते हुये 30 नवम्बर, 2021 को प्रयागराज पहुंचेगे। इस दौरान हमने जनसमुदाय को नदियों में कचरा न डालने, नदियों को प्रदूषित न करने की प्रेरणा के साथ गंगा के तटों पर पौधारोपण भी किया और कराया

रिटायर्ड इन्डियन आर्मी ऑफिसर आर. पी. पान्डे ने बताया कि गंगा परिक्रमा पदयात्रा प्रयागराज से 16 दिसम्बर, 2020 से आरम्भ हुयी थी। प्रयागराज से गंगासागर तक यात्रा की पश्चात हम गंगोत्री, गोमुख, देवप्रयाग, ऋषिकेश से होते हुये 30 नवम्बर, 2021 को प्रयागराज पहुंचेगे। इस दौरान हमने जनसमुदाय को नदियों में कचरा न डालने, नदियों को प्रदूषित न करने की प्रेरणा के साथ गंगा के तटों पर पौधारोपण भी किया और कराया।

गंगा परिक्रमा पदयात्रा के सदस्यों, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों, एनसीसी कैडर, ऋषिकेश और जीजीआईसी काॅलेज के छात्रों और प्राचार्य ने विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर जल संरक्षण का संकल्प लिया

गंगा परिक्रमा पदयात्रा के सदस्यों, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों, एनसीसी कैडर, ऋषिकेश और जीजीआईसी काॅलेज के छात्रों और प्राचार्य ने विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर जल संरक्षण का संकल्प लिया।