LPG गैस की कीमतों ने उज्जवला योजना की आग को किया ठंडा! कई लाभार्थी फिर लकड़ी और कोयला जलाने को विवश

पटना: महंगाई की मार ने प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की आग को भी ठंडा कर दिया है. उज्जवला की आग में अब वह ताप नही रही जिससे महिलाओं को धुएं से निजात मिल सके.

दरअसल, उज्जवला योजना में दिए गए गैस सिलेंडर की कीमत में आई भारी उछाल के कारण यह आम लोगों के पहुंच से दूर होता जा रहा है. इसके परिणामस्वरूप उज्जवला की चूल्हे की आग को महंगाई ने ठंडा कर दी है.

दरअसल, केन्द्र की मोदी सरकार के द्वारा गरीब परिवारों को नि:शुल्क सिलेंडर तो दे दिया गया, लेकिन गैस के दाम बढने से लाभार्थी इन्हें रिफिल नहीं करा पा रहे हैं. कोरोना महामारी की मार से परेशान आम आदमी अब उज्जवला के बारे में सोंच भी नही पा रहा है.

जुलाई की शुरुआत होते ही बढ़े एलपीजी गैस के दाम

अब तो हालात ऐसे हो गये हैं कि महंगे पेट्रोल-डीजल के बाद अब रसोई गैस की सब्सिडी भी नाम मात्र लगभग 75 रुपये प्रति सि‍लिंडर रह गई है. तेल कंपनियों ने जुलाई माह के पहले दि‍न ही रसोई गैस सिलिंडर के दाम 25.50 रुपये प्रति सिलिंडर बढा दिये हैं. अब 14.2 किलो के घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमत 933 रुपये हो गई है.

हैरान करने वाली बात तो यह है कि 15 माह में रसोई गैस सिलिंडर के दाम में 321 रुपये की वृद्धि हुई है. पिछले वर्ष मई में एलपीजी सिलिंडर की कीमत 621 रुपये थी. इसके बाद अगस्‍त में बढकर यह 683 रुपये हो गई. इसके अगले माह यानी सितंबर में यह राशि बढकर 692 रुपये प्रति‍ सिलिंडर हो गई.

इस दौरान ग्राहकों के खाते में सब्‍सिडी राशि‍ घटकर लगभग 76 रुपये आ रही थी. जून 2021 में रसोई गैस सि‍लिंडर की कीमत 907 रुपये हो गई थी और जुलाई में 25.50 रुपये बढकर 933 रुपये हो गई, लेकि‍न इस राशि में से सब्सिडी के रूप में आपके खाते में मात्र 79.36 रुपये जमा हो रहे हैं.

महंगाई ने तोड़ी कमर, लकड़ी और कोयले की आस

ऐसे में हालात में कई मध्यवर्गीय परिवारों ने महंगाई के कारण गैस के चूल्हे के स्थान पर लकड़ी और कोयले का चूल्हा जलाना शुरू कर दिया है. उपभोक्ता कह रहे हैं कि पहले आदत डाल दिया और अब गैस महंगी कर दी. सरकार परेशानी खत्म करने के बजाय बढ़ा रही है.

सिलेंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता पर बोझ बढ़ता जा रहा है. यह गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों के लिए एक बडी समस्या है. गैस सिलेंडर के दामों में इजाफा होने से उज्जवला योजना के 35 से 40 फीसदी लाभार्थियों ने फिर सिलेंडर नहीं भरवाया है.

उधर, सार्वजनि‍क तेल कंपनि‍यों के अधिकारियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि सब्सिडी घटाना-बढाना सरकार का निर्णय है. वहीं, उज्जवला की लाभार्थी उषा देवी ने कहा कि रसोई गैस के दाम बढाकर सरकार लोगों की कमर तोड़ रही है. कीमत बढने के बाद अब घरेलू रसोई गैस की कीमत 933 रुपये हो गई है. रसोई गैस की कीमतों में अचानक इतनी वृद्धि से महिलाएं परेशान हैं. ऐसी परिस्थिती में हमलोगों ने गैस भरवाना छोड दिया है और फिर से लकडी और कोयले की खोज करने लगे हैं.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सबको परेशान कर दिया है. कोरोना के बाद सरकार जनता को एक के बाद एक नया झटका दे रही है. यह गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक बडी समस्या है. सरकार ने अच्छे दिन का सपना दिखाकर जनता के साथ धोखा किया है. गरीब और गरीब होता जा रहा है.