देहरादून, शनिवार को दून पुस्तकालय में आयोजित एक गरिमामय एवं बौद्धिक समारोह में चर्चित पुस्तक ‘द डिकलाइन आॕफ द हिन्दू सिविलाइजेशन’ का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं। कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक शशि रंजन कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी पुस्तक के विचार, शोध और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, साहित्यकार, शोधार्थी, प्रशासनिक अधिकारी और बुद्धिजीवी वर्ग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन का माहौल गंभीर बौद्धिक विमर्श और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से समृद्ध रहा।
अपने संबोधन में लेखक शशि रंजन कुमार ने कहा कि यह पुस्तक केवल इतिहास का विवरण नहीं, बल्कि सभ्यता के उत्थान और पतन के पीछे छिपे सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कारणों को समझने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि हिंदू सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में से एक रही है, लेकिन समय के साथ इसमें आए बदलावों और चुनौतियों को समझना बेहद आवश्यक है।
मुख्य अतिथि आनंद वर्धन ने पुस्तक के विमोचन पर लेखक को बधाई देते हुए कहा कि इतिहास केवल अतीत का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मार्गदर्शक होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें समाज को अपनी जड़ों, परंपराओं और मूल्यों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को ऐसी पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. सुरेखा डंगवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में जब समाज तेजी से बदल रहा है, ऐसे में सभ्यता और इतिहास पर गंभीर अध्ययन और विमर्श की आवश्यकता और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों बल्कि आम पाठकों के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों और विद्वानों ने पुस्तक की विषयवस्तु पर अपने विचार साझा किए और इसे भारतीय सभ्यता के इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को इतिहास के विभिन्न पहलुओं को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करेगी।
समारोह के अंत में लेखक शशि रंजन कुमार ने सभी अतिथियों, आयोजकों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। पुस्तक विमोचन के बाद अतिथियों ने लेखक के साथ संवाद भी किया और पुस्तक के विभिन्न अध्यायों पर चर्चा की।
यह पुस्तक हिंदू सभ्यता के विकास, उसके संघर्षों, उपलब्धियों और पतन के कारणों पर आधारित एक गंभीर अध्ययन है, जो समाज और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




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