Sunday, April 19, 2026
HomeTrending Nowविश्व ऑटिज्म दिवस पर समावेशी शिक्षा को लेकर नई पहल

विश्व ऑटिज्म दिवस पर समावेशी शिक्षा को लेकर नई पहल

देहरादून, विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर मायरा केयर फाउंडेशन और साइन अवि लर्निंग यूएसए के सहयोग से स्थानीय प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता आयोजित की गयी। पत्रकार वार्ता में ऑटिज्म से जुड़े बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा और विशेष सेवाओं को लेकर महत्वपूर्ण पहल की जानकारी दी गयी।
पत्रकारों से रूबरू होते हुए फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी ने बताया कि संस्था ने भारत से अपनी तरह का पहला समग्र शिक्षण केंद्र स्थापित किया है, जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर आने वाले बच्चों के साथ-साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक चुनौतियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र में एक ही छत के नीचे प्रारंभिक हस्तक्षेप, व्यक्तिगत शिक्षा, सामाजिक और जीवन कौशल विकास तथा किशोरों और वयस्कों के लिए संरचित स्वतंत्र कार्य प्रणाली जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की रिवर्स माइग्रेशन योजना के अनुरूप है और उत्तराखंड सरकार के प्रवासी प्रकोष्ठ के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य राज्य में समावेशी और सतत बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है।
फाउंडेशन की संचालन प्रमुख अनीता थपलियाल ने ऑटिज्म शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में अपने दो दशक से अधिक के अनुभव के आधार पर एक विशेष समय-आधारित शिक्षण मॉडल विकसित किया है। उनके प्रयासों से प्रमाण-आधारित और संरचित कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, जो ऑटिज्म और अन्य विकासात्मक चुनौतियों वाले व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनने और अपनी क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं।
फाउंडेशन की सह-संस्थापक और प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. जया नवानी ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों के क्षेत्र में उनके अनुभव के आधार पर इस पहल को मजबूत चिकित्सकीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
इसी क्रम में साइन अवि पब्लिकेशन प्रा. लिमिटेड द्वारा समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विजुअल आधारित पाठ्यक्रम भी शुरू किया जा रहा है, जिसमें 2700 से अधिक पुस्तकें शामिल होंगी। यह पाठ्यक्रम उन बच्चों के लिए तैयार किया गया है, जो पारंपरिक शिक्षण पद्धति से सीखने में कठिनाई महसूस करते हैं।
संस्था के अनुसार साइन अवि एक स्टार्टअप के रूप में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के इनक्यूबेशन सेंटर एसीआईसी-एसआईआईसी में इन्क्यूबेशन सहायता के लिए विचाराधीन है। ऑनबोर्डिंग के बाद संस्था का उद्देश्य अपने प्रयासों का विस्तार करना और ऑटिज्म के क्षेत्र में नवाचारपूर्ण समाधान विकसित करना है।
फाउंडेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े बच्चों और युवाओं की क्षमताओं को पहचानते हुए उन्हें सम्मान और समान अवसरों के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments