देहरादून, प्रदेश सरकार ने स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा प्रकरण की जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस मामले में गठित एसआईटी की कार्यवाही अब न्यायिक निगरानी में होगी। इसके लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बीएस वर्मा को जांच पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
गृह सचिव शैलेश बगौली द्वारा जारी आदेश के अनुसार, न्यायमूर्ति वर्मा एसआईटी की जांच की गहनता से निगरानी करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित हो। उन्हें आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशभर में जाकर शिकायतों और सूचनाओं का संज्ञान लेने तथा जांच टीम को मार्गदर्शन देने का अधिकार भी प्रदान किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने 24 सितंबर को पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलोनी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। यह टीम एक माह के भीतर सरकार को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
पेपरलीक आंदोलन को उत्तराखंड इंसानियत मंच का समर्थन
देहरादून, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती घोटाले और लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के खिलाफ राज्यभर में युवा आक्रोशित व आंदोलनरत हैं। लाखों बेरोज़गार परीक्षार्थियों का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया गया है, जबकि दोषियों पर अभी तक कड़ी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच ने इस आंदोलन को पूरा समर्थन दिया है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधि लगातार आंदोलन में भाग ले रहे हैं।
मंच का कहना है कि परीक्षा लीक प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि व्यवस्था युवाओं के साथ धोखा कर रही है। आंदोलनरत युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग और धमकी देना लोकतंत्र पर कुठाराघात है ।
उत्तराखंड इंसानियत मंच की मांगें:
1. सभी दोषियों पर सख़्त कानूनी कार्रवाई और घोटाले की निष्पक्ष न्यायिक जांच।
2. परीक्षाओं को पारदर्शी व तकनीकी सुरक्षा के साथ पुनः आयोजित किया जाए।
3. बेरोज़गार युवाओं के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार मानते हुए उनकी आवाज़ सुनी जाए।
4. सरकार समयबद्ध भर्ती कैलेंडर घोषित करे।
उत्तराखंड इंसानियत मंच साफ़ चेतावनी देता है, “अगर युवाओं का भविष्य लूटा गया, तो ये आंदोलन सड़कों से विधानसभा तक गूंजेगा।”
“डबल वोटर–डबल खेल” पर सुप्रीम कोर्ट का हंटर-कांग्रेस का आरोप सच साबित : गरिमा
देहरादून, कांग्रेस पार्टी लगातार चेतावनी देती रही है कि देशभर में मतदाता सूची में भारी धांधली हो रही है और भाजपा इस गड़बड़ी के सहारे लोकतंत्र को हाईजैक करने की साज़िश रच रही है, यह कहना है उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी का। दसौनी ने कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी जी के नेतृत्व में देश भर में चल रहा “वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान आज और भी मज़बूत हो गया है।
गरिमा ने कहा कि उत्तराखंड में पंचायत चुनावों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने साफ़ कर दिया है कि राज्य निर्वाचन आयोग का रवैया पूरी तरह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक था। अदालत ने आयोग पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाकर यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
दसौनी ने कहा कि
धामी सरकार और भाजपा को सोचना चाहिए कि आखिर क्यों बार-बार चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह संयोग है या सुनियोजित साज़िश? उत्तराखंड निर्वाचन आयोग का परिपत्र—जिसमें कहा गया कि किसी व्यक्ति का नाम अगर दोहरी मतदाता सूचियों में है, तब भी उसका नामांकन रद्द न हो—दरअसल भाजपा के “डबल वोटर – डबल खेल” की खुली गवाही है।
गरिमा ने न्यायपालिका का आभार जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट, दोनों ने इस काले खेल पर सख्ती दिखाई है। अदालत का यह निर्णय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है और भाजपा सरकार के नापाक इरादों का पर्दाफाश भी।
मतदाता सूची में गड़बड़ी कर भाजपा ने युवाओं, किसानों और आम नागरिकों के मताधिकार पर हमला बोला है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बात का सबूत है कि कांग्रेस का आरोप पूरी तरह सही था।
जनता अब समझ चुकी है कि भाजपा “डबल इंजन” के नाम पर “डबल वोटर – डबल खेल” चला रही है। लेकिन कांग्रेस लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर कीमत पर संघर्ष जारी रखेगी।



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