हरिद्वार ( कुलभूषण) गुरुकुल कांगड़ी विशविद्यालय हरिद्वार के पूर्व कुलपति,आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के उपाध्यक्ष व साई ग्रुप के डायरेक्टर जनरल प्रो 0स्वतंत्र कुमार मुरगई की आज तृत्य पुण्यतिथि है। देश उन्हें नमन कर रहा है। प्रोफ स्वतंत्र कुमार मुरगई के पुत्र प्रो 0सुलक्ष्य कुमार मुरगई ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहाँ वे एक असामान्य व्यक्तित्व,नीति सिद्धांत, विचार एवं व्यवहार की सर्वोच्च चोटी पर रहते हुए सदैव जमीन से जुड़े रहने वाले व्यक्ति रहे।
अपने शुरूवाती दिनों में दीनानगर के स्वामी सर्वानन्द कॉलेज से प्रोफेसर के पद पर रहते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ,पठानकोट आर्य समाज में विशव शांति यज्ञ का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता स्वामी दिक्षानन्द, विजय चोपड़ा व पंडित हरबंस लाल शर्मा ने की।
ऍम डी के आर्य स्कूल के प्रथम मैनेजर के रूप में कई वर्षों तक सेवाएं भी दी, गिरधारी लाल गुप्ता , बलदेव राज कालरा व राम अहलूवालिया के मार्गदर्शन में विद्यालय ने कई कीर्तिमान स्थापित किये। पठानकोट के. ए .बी .कॉलेज बतौर प्रिंसिपल कॉलेज में आयाम स्थापित किये, सन 2002 का वो वर्ष था जब पठानकोट की धरती से पहले शिक्षाविद को विशव की प्राचीनतम संस्था गुरुकुल कांगड़ी विशविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया,वह कई वर्षों तक गुरुकुल में अपनी सेवाएं देने के बाद पठानकोट स्थित साईं ग्रुप के डायरेक्टर जनरल के रूप में अपना पदभार संभाला। उनका इंजीनियर एस. के .पुंज के साथ आत्मीयता से जुड़ना व पठानकोट के लिये एक साथ शिक्षा जगत में शहर का नाम रोशन करने के संकल्प से दोनों कार्य कर रहें थे। कँवर तुषार पुंज के पदभार सँभालते ही उनके साथ कंधे से कन्धा मिला संस्था में उत्कृष्ट कार्य किये।
जब वे अपनी पाकिस्तान यात्रा पर बतौर कुलपति गुरुकुल कांगड़ी गए तो वहाँ से शहीदे आजम भगत सिंह जी का ट्रायल लेकर आये जो आज भी गुरुकुल के संग्राहलय में मौजूद हैं। । वे राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहें व भाजपा से तो जन संघ के समय से उन्होनें कार्य किया। आज भी उनकी वक्तव्यों को लोग याद करते हैं। प्रो0 मुरगई आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के महामंत्री व् उपाध्यक्ष के पदों को भी सुशोभित कर चुके है इस दौरान उन्होंने कुलाधिपति सुदर्शन शर्मा व् महामंत्री प्रेम भरद्वाज के साथ आर्य समाज की संस्थाओं में अहम् भूमिका निभाई।
उनके द्वारा वेद प्रचार के लिए वेद वाणी को प्रसारित करने का कार्य किया गया जिसको आज भी उनके पुत्र प्रो0 सुलक्षय कुमार मुरगई निरन्तर प्रत्येक दिन विभन्न साधनों से प्रकाशित करते हैं जिसकी संख्या 1900 पहुँच गयी हैं जो की एक बहुत ही सराहनीय कार्य हैं। सम्पूर्ण विश्व आज प्रो0 स्वतंत्र मुरगई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है।



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