नई दिल्ली, विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को नकारते हुये चुनाव आयोग ने रविवार को पत्रकार वार्ता आयोजित की।पत्रकार से रूबरू होते हुये भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करता है, क्योंकि हर दल का जन्म आयोग में पंजीकरण से होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि आयोग के लिए कोई ‘पक्ष या विपक्ष नहीं है, सभी दल समकक्ष हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “कानून के अनुरूप हर राजनीतिक दल का जन्म चुनाव आयोग में पंजीकरण से होता है, तो चुनाव आयोग उन राजनीतिक दलों के बीच भेदभाव कैसे कर सकता है? चुनाव आयोग के लिए, कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है, सभी समकक्ष हैं। चाहे किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी हो, चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।” उन्होंने कहा, “पिछले दो दशकों से, लगभग सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में त्रुटियों को सुधारने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग ने बिहार से एक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत की है। एसआईआर की प्रक्रिया में सभी मतदाताओं, बूथ स्तर के अधिकारियों और सभी राजनीतिक दलों द्वारा नामित 1.6 लाख बीएलए ने मिलकर एक मसौदा सूची तैयार की है।”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “भारत के संविधान के अनुसार, 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले प्रत्येक भारतीय नागरिक को मतदाता बनना चाहिए और मतदान भी करना चाहिए।” ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष द्वारा मतदाताओं की तस्वीरों को मीडिया में दिखाए जाने का जिक्र करते हुए कहा, “हमने कुछ दिन पहले देखा कि कई मतदाताओं की तस्वीरें बिना उनकी अनुमति के मीडिया के सामने पेश की गईं। उन पर आरोप लगाए गए, उनका इस्तेमाल किया गया। क्या चुनाव आयोग को मतदाताओं, उनकी माताओं, बहुओं या बेटियों के सीसीटीवी फुटेज साझा करने चाहिए? मतदाता सूची में जिनके नाम होते हैं, वे ही अपने उम्मीदवार को चुनने के लिए वोट डालते हैं।”
उन्होंने कहा लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया में एक करोड़ से भी अधिक कर्मचारी, 10 लाख से भी अधिक बूथ लेवल एजेंट्स, 20 लाख से भी अधिक प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंट्स चुनाव के लिए कार्य करते हैं। इतने सारे लोगों के समक्ष इतनी पारदर्शी प्रक्रिया में क्या कोई मतदाता वोट की चोरी कर सकता है? कुछ मतदाताओं द्वारा दोहरे मतदान के आरोप लगाए गए, सबूत मांगने पर जवाब नहीं मिला। ऐसे मिथ्य आरोपों से न तो चुनाव आयोग डरता है न ही कोई मतदाता डरता है। जब चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर भारत के मतदाताओं को निशाना बनाकर राजनीति की जा रही है। ऐसे में चुनाव आयोग आज सबको स्पष्ट करना चाहता है कि हम निडरता के साथ सभी गरीब, अमीर, बुजुर्ग, महिला और युवा समेत सभी वर्गों और सभी धर्मों के मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा था, खड़ा है और खड़ा रहेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त का पलटवार : राहुल सात दिन में हलफनामा दें या फिर देश से माफी मांगें
नई दिल्ली, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पलटवार किया है। राहुल के आरोप पर उन्होंने कहा कि 7 दिन में हलफनामा देना होगा या फिर देश से माफी मांगनी होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारत में विश्व की सबसे बड़ी मतदाता सूची, सबसे बड़ी चुनाव कर्मियों की फौज और सबसे अधिक मतदान करने वाले लोगों की संख्या है। इसके बावजूद मीडिया के सामने यह दावा करना कि अगर किसी का नाम मतदाता सूची में दो बार है, तो उसने दो बार मतदान किया होगा। हमारे सारे मतदाताओं को अपराधी बनाना और इसके बावजूद चुनाव आयोग शांत रहे, ऐसा संभव नहीं है। हलफनामा देना होगा या फिर देश से माफी मांगनी होगी। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। मैं मीडिया के माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि अगर 7 दिन में हलफनामा नहीं मिला, तो ये सभी आरोप बेबुनियाद माने जाएंगे। हमारे मतदाताओं के बारे में यह बोलना कि वह फर्जी है, जो भी इस बात को बोल रहा है, उसे माफी मांगनी चाहिए।”
महाराष्ट्र के वोटरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट बढ़ी। जब समय था तो दावे और आपत्तियां क्यों जमा नहीं कराई गई ? जब रिजल्ट आ गया तो उस दौरान याद आया कि यह गलत था। एक भी मतदाता का नाम सबूत समेत अभी तक महाराष्ट्र के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को नहीं मिला। महाराष्ट्र में चुनाव हुए आठ महीने हो गए हैं। इसके बावजूद उच्चतम न्यायालय में चुनावी याचिका दायर क्यों नहीं की गई? इसके अलावा, यह भी कहा गया कि आखिरी घंटे में इतना मतदान कैसे हुआ और इसका जवाब आयोग ने दिया भी है। मैं इतना ही कहूंगा कि सच तो सच ही होता है और सूरज पूरब में ही उगता है। किसी के बोलने से पश्चिम में नहीं उगेगा।”
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यह भी कहा, “चुनाव आयोग 75 सालों से पूरी कर्मठता के साथ काम कर रहा है। अगर आप मतदाता सूची और मतदान को मिलाकर चुनाव आयोग पर निराधार आरोप लगाएंगे और कहेंगे कि चोरी हो रही है, तो ये गलत है। जनता सब समझती है। अगर किसी व्यक्ति के दो जगह वोट भी हों, तब भी वह एक ही जगह वोट करने जाता है। दो जगह वोट करना कानूनी अपराध है और अगर कोई व्यक्ति ऐसा कहता है, तो सबूत चाहिए। सबूत मांगा था, लेकिन नहीं मिला



Recent Comments