जब तक कश्मीर में हिंदू राजा था हिंदू और सिख सुरक्षित थे, पर अब कोई नहीं: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हिंदुओं और सिखों में दरार डालने की कोशिश हो रही है। यदि वे लोग सफल हो गए तो सिख समुदाय की स्थिति अफगानिस्तान में बसे सिखों जैसी असुरक्षित होगी।
इस समय अफगानिस्तान में सौ सिख बचे हैं, जिनकी स्थिति दयनीय है। कश्मीर में जब तक हिंदू राज्य था तब तक हिंदू और सिख दोनों सुरक्षित थे, जबसे वहां सत्ता दूसरे शासकों के हाथ में गई, तब से इन्हीं को पलायन करना पड़ा।

मुख्यमंत्री सोमवार दोपहर पीडब्ल्यूडी के विश्वेश्वरैया सभागार में भाजपा की ओर से गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में सिख समागम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि केसरिया सिख परंपरा का ध्वज है। इसे कोई कांग्रेसी, बसपाई और सपाई नहीं फहरा सकता है, इसे कोई भाजपाई या हम जैसा व्यक्ति ही लहरा सकता है। उन्होंने एलान किया कि प्रदेश में खुलने वाले आठ मेडिकल कॉलेजों में से एक गुरुनानक देव के नाम पर होगा, जबकि अन्य संस्थानों को गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह के नाम से जाना जाएगा।

उन्होंने कहा कि 1984 दंगे के आरोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। इसकी रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार की सिफारिश के अनुसार पीड़ितों को उचित मुआवजा भी दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सिख समुदाय यूपी में पूरी तरह सुरक्षित है और खुले दिल से अपने हित की बात सरकार से कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख समुदाय को सरकार से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। गुरुनानक देव से लेकर गुरु गोविंद सिंह तक सिख समुदाय ने देश व समाज की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया है, उसके बाद किसी भी सरकार का कर्तव्य है कि वह इस समुदाय को बिना मांगे उनका वास्तविक हक दे।

लखनऊ के सिख कंजूस
योगी ने चुटकी लेते हुए कहा कि सिख समुदाय से उनका पुराना नाता है। वे गोरखपुर में हमेशा सिख समुदाय के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं और लंगर भी चखते हैं, लेकिन लखनऊ के सिख कंजूस हैं, बुलाते हैं लेकिन लंगर नहीं खिलाते।