आज के दिन क्‍यों की जाती है मशीन की पूजा, जानें विश्वकर्मा जयंती का महत्व एवं पूजन विधि

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आज पूरी दुनिया में तमाम तरह के भवन, महल और बड़े बड़े औजार इंजीनियर बनाते हैं लेकिन क्या आपने सोचा है कि देवताओं के महल, उनके घर और अस्त्र शस्त्र किसने बनाये थे? असल में देवताओं के भवनों और महलों को विश्वकर्मा भगवान ने बनाया था। विश्वकर्मा देवताओं के शिल्कार थे और उनके जन्मदिन को अर्थात हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को पूरी दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर होजे का दर्ज़ा प्राप्त हैं।

आज के दिन लोग फैक्‍ट्रियों, कार्यालयों या उद्योगों में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों की पूजा करते हैं। अगर आप किसी मशीन की बजाय कंप्यूटर या लैपटॉप कर काम करते हैं तो आपको उसकी भी पूजा आज के दिन जरूर करनी चाहिए।

शुभ मुहूर्त :
पंचांगों के अनुसार आज के दिन दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक ही पूजा करना ज्यादा शुभ है, हालांकि आप अपनी सुविधानुसार दिन में कभी भी पूजा कर सकते हैं। इस दिन भगवान विश्वकर्मा और मशीनों की पूजा करने से काम में और तरक्की मिलती है।

पूजा की विधि :
पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करें और उसके बाद अपनी मशीन को अच्छे से साफ़ कर लें। उसके बाद घर के मंदिर में जाकर विष्णु भगवान और विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें और कमंडल में कुछ फूल रखकर भगवान और मशीन पर चढ़ाएं। घर के आंगन में आठ फूलों वाला कमल बनाएं और उसमें सात तरह के अनाज रखें। इस अनाज पर मिट्टी के बर्तन में रखें पानी से छिडकाव करें। अब सात प्रकार की मिट्टी, अनाज, फूलों और दक्षिणा को एक साफ़ कपड़े में लपेटकर रख लें और अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।

विश्वकर्मा जी की आरती :

अंत में सब लोग खड़े होकर इस आरती को गाएं।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥
जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥
श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥