मां सरस्वती की आराधना का दिन है वसंत पंचमी, जानें क्या है पूजा विधि

वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की वंदना की जाती है। पंचमी तिथि में पड़ने के कारण इसे वसंत पंचमी या श्रीपंचमी कहा जाता है। कल यानी 30 जनवरी गुरुवार को वसंत पंचमी पर सरस्वती देवी की विधि विधान से पूजा की जाती है। मां सरस्वती के आशीर्वाद से बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला में निपुणता प्राप्त होती है। सरस्वती पूजा में सरस्वती वंदना जरूर करनी चाहिए। हम आपको बताते हैं कि मां सरस्वती की पूजा की विधि क्या है।

पूजा विधि

वसंत पंचमी के दिन प्रात: काल स्नान के बाद पूजा स्थल पर मां सरस्वती की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें। फिर गणेश जी और नवग्रह की पूजा करें। इसके बाद मां सरस्वती की पूजा प्रारंभ की जाती है। सबसे पहले उनका गंगा जल से स्नान कराएं, फिर उनको सफेद और पीले फूल तथा माला अर्पित करें। देवी को पीले रंग के फल चढ़ाएं और उनके चरणों में गुलाल अर्पित करें। उनको सिंदूर और श्रृंगार की वस्तुएं भी चढ़ाएं। फिर धूप, दीप और गंध से उनको सुशोभित करें। मां सरस्वती सफेद वस्त्र पहनती हैं, इसलिए उनको श्वेत वस्त्र अर्पित करें या पहनाएं। माता को सफेद रंग की मिठाई, खीर का भोग लगाएं। प्रसाद में पीले या केसरिया रंग के फलों और मिठाइयों को ग्रहण करें, इससे विशेष कृपा प्राप्त होगी।

वसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें

मां सरस्वती ज्ञान, गायन- वादन और बुद्धि की अधिष्ठाता हैं। इस दिन छात्रों को पुस्तक और गुरु के साथ और कलाकारों को अपने वादन के साथ इनकी पूजा अवश्य करनी चाहिए।
इस दिन नया काम करना बहुत शुभ फलदायक होता है इसलिए नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, नवीन व्यापार प्रारंभ और मांगलिक कार्य किए जाते है।

शिक्षा प्रारंभ करने के लिए वसंत पंचमी विशेष दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन से बच्चों को विद्यारंभ करवानी चाहिए।

यदि बच्चा 6 माह का हो चुका है तो अन्नप्राशन संस्कार यानी जीवन का पहला अन्न इसी दिन खिलाना चाहिए।

विद्या और ज्ञान वृद्धि के लिए इस दिन गरीब बच्चों को किताबें और कॉपियां, कलम और पढ़ाई के लिए उपयोगी चीजें बांटना चाहिए।

गुरु और माता-पिता हमेशा ही पूजनीय होते हैं, लेकिन इस दिन विशेषकर इनका अपमान ना करें। कॉपी-किताब और विद्या एवं ज्ञान से जुड़ी चीजें। इस दिन झूठ और अपशब्द भी नहीं बोलना चाहिए।