उत्तराखंड़ : बीस बरस में सिर्फ राजनीतिक झगड़े

✒️प्रेम पंचोली की कलम से

पूर्व से ही उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव का अलग महत्व रहा है। इस बार भी रहेगा। क्योंकि अलग राज्य को बने हुए 20 बरस हो गये है। इन 20 बरस में लोग अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछे तो अतिश्यक्ति नहीं होगी। हालात ऐसे है कि राज्य में विकास नाम की एक भी कोई चीज सामने नही है। यदि है तो राजनीतिक उठा-पटक की कई ध्रुत कहानियां। जिन कहानियों ने कई बार राज्य का विकास रोका है।

आगामी 2022 में विधानसभा चुनाव सामने है। फिर से संभावित उम्मीदवार मैदान तलाशने लग गये है। सभी राजनीतिक पार्टीयों के लोग अपनी-अपनी कमर कसने लग गये है। परन्तु कोई भी राजनीतिक संगठन बताने के लिए तैयार नहीं है कि उत्तराखण्ड में रोजगार की नीति उनके कार्यकाल में इस तरह से बनी है। विकास के मानक उन्होंने जो तैयार किये है उन पर सवाल क्यों उठ रहे है। पहाड़ पर सड़क, व दूर संचार की व्यवस्था क्यों बदस्तूर है। ये कुछ सवाल है जिनके उत्तर न तो संभावित उम्मीदवारो के पास है और न ही राजनीतिक संगठनो के पास है।

इधर इक्कसवीं सदी की राजनीतिक पार्टी ‘आप’ भी 2022 के विधानसभा चुनाव में की तैयारी कर रही है। इस पार्टी के पास विकास के इतिहास और विकास के कार्यक्रमो की कोई सूची नही है। मगर ये पार्टी जनआंकांक्षाओं पर खरा उतरना चाहती है। राजनीतिक पंडितो का मानना है कि उत्तराखण्ड में आप पार्टी से भाजपा, कांग्रेस से बिछड़े या दरकिनार किये हुए कार्यकर्ता जुड़ रहे है। जबकि दिल्ली में आप पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता है। ऐसा इस राज्य में आप पार्टी के साथ जुड़ने वाले कार्यकर्ताओं की गतिविधियां बता रही है।

बीस बरस में इस राज्य ने राजनीतिक प्रतिद्वन्दता का नंगा नाच देखा, आपदा की वह काली रात देखी, मगर स्कूलो में व्यवस्थित शिक्षक, बन्द पड़े अस्पतालो के खुलते ताले और वहां बैठे चिकित्सक कभी नहीं देखे। यही नहीं 20 बरस में राज्य के लोगो ने देखा कि उनके राज्य में बिजली पैदा हो रही है, किन्तु राज्यवासियों से बिजली का भुगतान खूब वसूला जा रहा है। राज्य के लोग जंगल बचाने के कई प्रकार के काम करते है, परन्तु वन कानून का डर भी राज्यवासियों को सताता है।

बीस बरस से राज्य के लोग की मांग है कि स्कूलो में शिक्षक हों, पारदर्शी स्थनान्त्रण नीति हो, रोजगार की कारगर नीति हो, अस्पतालो में चिकित्सक हों, राज्य में बिजली पैदा हो रही है तो राज्यवासियों को निशुल्क बिजली प्राप्त हो। राज्य के गांव दूरसंचार और यातायात से व्यवस्थित रूप से जुड़े। जानकारो का मानना है कि यदि राज्य के कर्णधार यह कर बैठे तो आत्मनिर्भर भारत की इबारत उत्तराखण्ड से लिखी जायेगी।