उत्तराखंड़ : पहला टाइगर ट्रांसलोकेशन सफल, जिम कार्बेट की बाघिन को पहली बार ट्रांसलोकेट कर मिला नया घर

देहरादून, उत्तराखण्ड़ का पहला टाइगर ट्रांसलोकेशन सफल होने के बाद बाघिन को बाड़े से जंगल में छोड़ा गया। बुधवार रात को कॉर्बेट से एक बाघिन को रेडियो कॉलर के बाद विशेष एम्बुलेंस से रवाना किया गया था, जो गुरुवार को राजाजी पार्क पहुंची। दून के मोतीचूर रेंज में बने बाड़े में चार दिन रखा गया। इस दौरान पार्क निदेशक डीके सिंह व एनटीसीए के सदस्य सचिव एसपी यादव भी मौजूद थे। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस सुहाग ने बताया कि जल्द ही एक बाघ भी लाया जाएगा।

जिम कॉर्बेट पार्क के निदेशक राहुल के अनुसार पहले चरण में एक बाघिन व एक बाघ के ट्रांसलोकेशन की परमिशन है। इसके बाद एक बाघ व दो बाघिन और लायी जाएंगी। राजाजी पार्क के निदेशक डीके सिंह ने बताया कि पार्क के पश्चिमी इलाके में सिर्फ दो बाघिन हैं। वे भी बूढी हो चुकी हैं। जिस कारण वहाँ सालों से बाघों की आबादी नहीं बढ़ी। इसी मकसद से पांच बाघ बाघिन वहाँ लाए जाने हैं। जिसकी एनटीसीए परमिशन दे चुका है।

रायवाला देहरादून के मोतीचूर रेंज में शिफ्ट की गई बाघिन को पूरी तरह स्वस्थ होने और सामान्य व्यवहार के चलते उसे जंगल में छोड़ दिया गया है। कॉलर आईडी के जरिए उस पर लगातार नजर रखी जा रही है। मोतीचूर रेंज में बाघिन की शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद जंगल सफारी पर भी रोक लगा दी गई है। पार्क निदेशक डीके सिंह ने बताया कि शीघ्र ही दूसरे बाघ को भी शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

गुरुवार को पहले चरण में एक मादा टाइगर की शिफ्टिंग के बाद रेंज के भीतर बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिम कॉर्बेट में चिह्नित सभी पांच बाघों की शिफ्टिंग के बाद उनके सामान्य व्यवहार होने पर ही सफारी को अनुमति मिल सकती है। रेंज में मौजूदा समय में कुल 18 पंजीकृत वाहन है, इस मौके पर सदस्य सचिव एमपीसीए एसपी यादव मुख्य वन्यजीव संचालक जेएस सुहाग रेंजर महेंद्र गिरि गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।