स्कूटी और बाइकों को टैक्सी के रूप में चलाने से बाधित हो रही यातायात व्यवस्था, नहीं हो रहा नियमों का पालन

मसूरी। मसूरी में स्कूटी व बाइकों को टैक्सी के रूप में चलाने के लिए बड़ी संख्या में स्थान स्थान पर बोर्ड लगा दिए गये हैं। वहीं लाइब्रेरी के गांधी चौक पर तो स्कूटी वालों का कब्जा की हो गया लगता है। जिसके कारण मसूरी में एक नई समस्या पैदा हो गई है। लेकिन इस पर प्रशासन, नगर पालिका व पुलिस अंकुश नहीं लगा पा रही हैं। जिसका प्रभाव मसूरी की यातायात व्यवस्था पर पर रहा है। जबकि स्कूटी टैक्सी के रूप मंे चलाने के बाकायदा आरटीओ ने कायदे कानून बना रखें हैं लेकिन कोई भी इनका पालन नहीं कर रहा। स्कूटी व बाइकों का व्यवसाय करने के लिए आरटीओ विभाग ने नीति बनाई है लेकिन मसूरी में शायद ही कोई स्कूली व बाइक का व्यवसाय करने वाला होगा जो निर्धारित मानकों को लागू कर रहा होगा। लेकिन कोई भी सरकारी संबंधित विभाग के ध्यान न देने के कारण लगातार हर कोई इस व्यवसाय में उतर रहा है। मालरोड सहित अनेकों स्थान पर स्कूटी किराये पर उपलब्ध है के बोर्ड लगे हैं वहीं मालरोड पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है लेकिन सबसे अधिक बोर्ड मालरोड पर ही लगे हैं।

जो सीधा सीधा संबंधित विभाग की लापरवाही का प्रमाण है। गांधी चौक सहित अन्य स्थानों पर स्कूटी का व्यवसाय करने वालों ने स्थान कब्जा रखें हैं लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है। गांधी चौक का चौड़ी करण तो शायद एमडीडीए ने स्कूटी किराये पर देने वालों के लिए ही किया है। पूर्व में एसडीएम ने भी इस बांत का संज्ञान लिया था व कार्रवाई की बात की थी। लेकिन किसी पर अवैध पार्किंग या नियमों का पालन न करने का कोई चालान हुआ हो ऐसा दिखता नहीं जिस कारण इनके हौंसले बुलंद हैं। स्कूटी या बाइक किराये पर देने का व्यवसाय करने वालों के लिए बाकायदा नियम कानून बने हैं, उसके आधार पर ही यह स्कूटी किराये पर देने का संचालन कर सकते हैं। किसी सार्वजनिक स्थान पर यह स्कूटी खड़ी कर व्यवसाय नहीं कर सकते।स्कूटी व बाइक खड़ा करने की पार्किंग होनी चाहिए और उनकी संख्या भी निर्धारित की जाती है। उससे अधिक दुपहिया रखना भी अपराध होगा। जहां पार्किंग होगी वहां शैड बना होना चाहिए आदि अनेक नियम कानून बने हैं लेकिन मसूरी में इसे देखने वाला कोई नहीं है। जहां से इन्हें लाइसेंस मिलता है उसके पहले उन्हें सभी नियम कानूनों की पूर्ति करनी होती है। पर यहां तो मनमर्जी का राज है कोई देखने वाला नहीं है। जिसके चलते यह अवैध धंधा बेलगाम होकर चलाया जा रहा है।