गणपति महोत्सव के चलते मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे है मूर्तिकारों के परिजन रोज तीन से चार प्रतिमाएं तैयार हो जाता हैः कृपाराम

हरिद्वार अगस्त 13 (कुल भूषण शर्मा) प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले गणपति महोत्सव को लेकर जहा विभिन्न आयोजक मण्डल इस आयोजन को लेकर अपनी तैयारियो को अन्तिम रूप देने में लगे है। वही इन आयोजनो में प्रतिष्ठित की जानी वाली भगवान गणेश जी की प्रतिमा को बनाने वाले मूर्तिकार अपने परिजनो के साथ इन मूर्तियो को बनाने व सजाने के काम में दिन रात इन दिनो एक किये हुए है। नगर में सेक्टर टू भगत सिंह चौक के पास सडक के किनारे अपने परिवार के साथ रहकर इन मूर्तियो को बनाने का काम कर रहे मूर्तिकार कृपाराम कहते है की वह पिछले काफी सालो से मूर्तियो को बनाने का काम करते आ रहे है। उनका कहना है कि उनके परिवार में उनके तीन लडके व तीन लडकिया सभी मिलकर मूर्ति बनाने का काम करते हैै। उन्होने कहा की वह मूल रूप से राजस्थान के पाली जनपद के रहने वाले है। तथा उनका परिवार विभिन्न क्षेत्रो में रहकर इसी प्रकार मूर्तिया बनाकर अपना जीवन यापन करते है।

कृपाराम ने कहा की वह एक फीट से लेकर आठ दस फीट तक के साईज की मूर्तिया बनाते है जिनकी बाजार में कीमत एक सौ रूपये से लेकर आठ दस हजार रूपये तक मिलती है। उन्होने बताया की इन मूर्तियो के निर्माण में खडिया मिटटी व नारीयल की जूट का प्रयोग किया जाता है। एक दिन में तीन से चार मूर्तिया तैयार हो पाती है। उन्होने कहा की अगामी गणपति महोत्सव के चलते उनके पास अभी तक चार पाच आर्डर आ चुके है। वही बडी संख्या में नगर के विभिन्न क्षेत्रो से आकर लोग गणपति आयोजन के दौरान अपनी अपनी जरूरत के अनुसार मूर्ति खरीद कर अपने अपने घरो में स्थापित कर गणपति पूजन करते है। उन्होने बताया की गणपति पर्व के बाद वह नवरात्रे पर्व के चलते देवी भगवती की मूर्तियो को तैयार करने में लग जाते है इस प्रकार साल भर वह विभिन्न मूतिर्यो को बनाकर अपने परिवार का भरणपोषण कर इस प्राचीन मूर्तिकाल को जिन्दा रखने का काम कर रहे है। आज के बदलते समाजिक परिवेश में इस कला के माध्यम से अपने परिवार का पालन करना किसी चुनौति से कम नही है।