आरे जंगल में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई पेड़ों की कटाई पर रोक

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नई दिल्ली,। मुंबई के आरे जंगल की जंग अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में पेड़ों के काटे जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुई रोक लगा दी है। इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मसले पर कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं, इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्या हम सभी याचिकाएं सुनें या फिर किसी एक याचिका को सुने जिसमें सभी मुद्दे हो। सुप्रीम कोर्ट में छात्रों की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, महाराष्ट्र सरकार की ओर से तुषार मेहता और मुंबई मेट्रो की ओर से मनिंदर सिंह दलीलें दी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब पेड़ों की कटाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों की कटाई को तुरंत रोकने और आगे कोई भी पेड़ ना काटे जाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर महाराष्ट्र सरकार ने हामी भरी है।

गौरतलब है कि आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स की ओर से पेड़ों को काटने के विरोध में लिखे गए लेटर को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई की बात कही है। कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन भी कर दिया है। बीते दिनों लॉ स्टूडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया था।

पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रेमी और कार्यकर्ता मेट्रो शेड के लिए सैकड़ों की संख्या में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। आरे कॉलोनी में मेट्रो शेड के लिए मुंबई पुलिस, मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और ग्रेटर मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन 2700 पेड़ों का कटान कर रहे हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए इस इलाके में कार शेड बनाने का पहले से ही विरोध हो रहा था। कार्यकर्ता पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं। इलाके में पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। शनिवार को प्रदर्शन कर रहे लोगों की पुलिसकर्मियों से हाथापाई के बाद इलाके में धारा 144 भी लगा दी गई थी।