गंगा दशहरा पर विशेष :-अविरल बहती गंगा के प्रति आस्‍था, समर्पण और उपासना का सार्थक पर्व

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(चन्द्रशेखर पैन्यूली) आज गंगा दशहरा है यानि मोक्षदायिनी गंगा जी आज के ही दिन स्वर्गलोक से धरती पर अवतरित हुई थी।गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को मनाया जाता है,यानि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को भगीरथ की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर राजा भगीरथ के 60 हजार पुरखों के उद्धार करने और धरती वासियों की प्यास बुझाने माँ गंगा धरती पर अवतरित हुई।इक्ष्वाकु वंश के राजा दिलीप,राजा सगर,राजा भगीरथ,यानि प्रभु श्रीराम के पूर्वजों के कठिन जप तप से माँ गंगा धरती पर अवतरित हुई।शिवजी की जटाओं से जब गंगाजी निकली तो राजा भगीरथ के पीछे पीछे जाती रही,यही कारण है कि गौमुख,गंगोत्री से लेकर देवप्रयाग अलकनन्दा से मिलन होने तक गंगाजी को भागीरथी नाम से ही जाना जाता है।आज का दिन दान,पुण्य,गंगा सहित अन्य नदियों में स्नान का विशेष महत्व है,इस वर्ष 75 सालों बाद 10 पापों से पुण्य अर्जित करने का सुखद संयोग भी बना है,करोड़ो लोग गंगा जल से स्नान करके पुण्य अर्जित कर रहे हैं।पूजा,पाठ ,दान,अनुष्ठान का आज के दिन कई गुना फल प्राप्त होता है,ऐसी मान्यता है।
माँ गंगा सिर्फ एक नदी नही बल्कि हमारी आस्था का केंद्र भी है,करोड़ो लोगों की प्यास बुझाने वाली,लाखों हेक्टेयर जमीन को सींचने वाली,जन्म से लेकर मृत्यु तक विभिन्न क्रिया कलापों को अपने तट पर संचालित करने वाली,माँ गंगा हमारे देश की पहचान है,जिसे कि हम राष्ट्रीय नदी भी कहते है,गंगा जल सदैव  पवित्र होता है,भले ही वो कई वर्षों पुराना हो,गंगाजल को अमृत कहा जाता है,हमारे सनातन धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक गंगा जल से ही शुद्धि मानी जाती है,गोमूत्र और गंगाजल को सीधे तौर से अमृतपान समझा जाता है।गंगा हमारे श्रेष्ठ पौराणिक कथाओं से लेकर आज तक के विभिन्न कार्यकर्मो की साक्षी भी है।देवताओं से लेकर आज तक माँ गंगा ने न जाने कितनों के जीवन को अपने निर्मल जल से एक नई राह दिखाई है।
युगों युगों से कल कल करती,अपने निर्मल जल को लेकर अविरल बहती गंगा को आज हम मनुष्यो ने जगह जगह कैद कर दिया है,भयानक प्रदूषण से हमने गंगा की निर्मलता को भी खत्म कर दिया है।आज हमारे आधुनिकता ने न माँ गंगाजी को निर्मल रखा और न अविरल,क्योंकि गंगा के मायके से ही छोटे बड़े सैकड़ो बांध बनाकर हमने इसकी अविरलता का काम किया है,कई गंदे नाले,मल मूत्र,और सीवर लाइन सहित फैक्ट्रियों का गंदा पानी गंगा जी में प्रवाहित कर रहे हैं जिससे गंगाजी का निर्मल जल प्रदूषित हो रहा है,हालात ये हो गए हैं कि हरिद्वार के बाद गंगाजल को आचमन लायक शुद्ध  भी नही  पाया गया है।कानपुर में गंगा जी बेहद प्रदूषित है, यहाँ ये पता नही लग पाता कि गंगाजी में काला पानी है या कालेपानी में गंगाजी।गंगा जी का मुख्य उद्गम गौमुख में है, मुख्य मंदिर गंगोत्री में है, जो कि उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में पड़ता है,लेकिन भारी मन से कहना पड़ रहा है कि मोक्षदायिनी गंगा को उसके मायके यानि उत्तरकाशी में ही कैद किया गया है,मनेरी भाली परियोजना हो या विश्व के बड़े बाँधो में शुमार टिहरी बांध,मायके में ही गंगा की अविरलता को रोका गया साथ ही बड़ी बड़ी बस्तियां, नगर,और कृषि भूमि को जबरन डुबोया गया जो कि यहाँ से पलायन का बड़ा कारण बचा,जो लोग बांध के उस पार रहे वो आज विकास के लिए तरस रहे हैं, जिनमे मुख्यतः प्रतापनगर क्षेत्रवासी,हमने गंगा जी की अविरलता को तो रोका ही,साथ ही प्रदूषित करने में भी अहम भूमिका निभाई,जो कि हम सभी के लिए शर्मनाक है,माँ गंगा को प्रदूषित करने का पाप हम जन्मों जन्मों तक नही धो पाएंगे।
गंगा दाशहरा गंगा जी के प्रति आस्था,समर्पण और गंगाजी की उपासना का मुख्य पर्व है लेकिन हम अपने पापो को धोने के लिए तो गंगाजी की शरण में जाते हैं पर वहीं हम प्रदूषण फैलाते हैं जो बेहद सोचनीय है।यूँ तो गंगा जी की सफाई के लिए हजारों NGO सहित ,गंगा बेसिन प्राधिकरण,गंगा नदी को निर्मल स्वच्छ बनाने के लिए दिखाने के लिए लाखों लोगों के डाटा है,पर जमीन पर यदि उतने कार्य होते तो शायद गंगाजी आज इतनी प्रदूषित न होती।गंगाजी की सफाई के नाम पर कई लोग अपना बिजनेस चला रहे हैं, उनकी दुकाने चल रही है,पर गंगाजी प्रदूषित होती जा रही है।कानपुर, वाराणसी,प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में गंगाजी में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है,महाकुंभ हेतु जरूर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गंगाजी को स्वच्छ करने के अस्थाई प्रयास किये लेकिन कुम्भ् की सम्पन्नता के बाद प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है।
आज उत्तरकाशी से लेकर गंगा सागर तक हजारों किमी में बहने वाली माँ गंगा की अविरलता को रोकने में और प्रदूषण को फैलाने में हम सभी कहीं न कहीं जिम्मेदार ही है।सरकार का क्या वो तो आज किसी की कल किसी की और परसों किसी की पर गंगाजी की कोई भी सरकार न हो पाई,मुझे तो ये पढ़कर बड़ा दुःख हुआ जब गंगा सफाई के मसले पर एक पूर्व आद्यत्मिक मंत्री ने कहा कि गंगा की सफाई की जिम्मेदारी अब मेरी नही जिंनके पास जिम्मेदारी है अब उन्हें पूछो,जब ऐसे जिम्मेदार और आध्यत्मिक लोग ऐसा कहेंगे तो आम व्यक्ति से क्या अधिक उम्मीद रखें।गंगाजी के नाम पर न जाने कितने लाख लोगों के घर में रोटी बनती है,लेकिन फिर भी गंगाजी के प्रति हमारी उदासीनता एक खतरनाक संकेत है।हम उत्तराखण्ड के निवासी है यानि गंगाजी के मायके वाले,हमने गंगाजी की शुद्ध सफेद और निर्मल जल की धारा को देखा है,जब हम कानपुर जैसे शहरों में गंगाजी को देखते हैं तो मन को बड़ी पीड़ा होती है,क्योंकि कहाँ वो अमृत जल और कहाँ ये काला, मैला पानी यहाँ पहुंचकर बेहद प्रदूषित हो चला है।
गंगा जी की निर्मलता के लिए आज भी किसी भगीरथ के इंतजार में है माँ गंगा,बातें और तथ्य अनेकों हैं जो हमारी पहचान और श्रेष्ठ विरासत गंगाजी को बेहद बुरे दौर में ले जाने हेतु सहायक हुए,लेकिन आज गंगा दशहरा है,माँ गंगाजी को नमन करते हुए हम सभी के ऊपर माँ गंगा जी का आशीर्वाद बना रहे,सरकार सहित जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों, अधिकारियों,मंत्रियों आदि को माँ सद्बुद्धि दे कि वो गंगाजी की निर्मलता हेतु वास्तविक धरातल पर कार्य करके गंगा प्रदूषण को कम करने हेतु कारगर उपाय करें।