कोरोना समाप्ति को लेकर संतों ने किया हवन का आयोजन

हरिद्वार सितम्बर 05 (कुल भूषण शर्मा) सिद्वपीठ मायादेवी मन्दिर तथा आंनद भैरव मन्दिर की उचाई  बढाने की उत्तराखण्ड शासन से अनुमति मिलने तथा देश से सहित विश्व से कोरोना महामारी के खात्मे को लेकर शनिवार को मायादेवी मन्दिर प्रांगण में हवन का आयोजन किया गया। हवन में प्रदेश के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक तथा श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े अन्र्तराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरिगिरि सहित कई संतो ने आहूतियां दी।

इस मौके पर  शहरी विकास मंत्री ने कहा कि मन्दिर की उचांई बढ़ाने के कार्यो में शासन पूरी तरह से अखाड़े का सहयोग करेगा। अब शीघ्र ही मायादेवी तथा आनंद भैरव के मन्दिर की उचाईयां बढ़ाई जायेगी। शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने सिद्वपीठ मायादेवी तथा आनंद भैरव के मन्दिर की उचाई बढ़ाने की अनुमति प्रदान कर दी। उचाई बढ़ाने के प्रस्ताव पर केन्द्रीय विमानन मंत्रालय,अग्निशमन विभाग के साथ साथ आपदा मत्रंालय ने आपत्तियां लगाते हुए रोक लगा दी थी,लेकिन जूना अखाड़े द्वारा आपत्तियों का निस्तारण किये जाने के बाद शासन ने मायादेवी मन्दिर की उचाई 271 और भैरव मन्दिर की उचाई 171 फुट रखने सम्बन्धी हरिद्वार विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार को मायादेवी मन्दिर में हवन यज्ञ का आयोजन किया।

इस अवसर पर शहरी विकासमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि जूना अखाड़े के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर सरकार ने स्वीकृति दे दी है। गंगा जी के तट पर हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी मन्दिर की उचाईयां बढ़ने से हरिद्वार का और भी विकास होगा। कहा कि उन्हे उम्मीद है कि उत्तर भारत मंे मायादेवी मन्दिर की उचाई सबसे ज्यादा होगी,निश्चित ही इससे हरिद्वार की भव्यता में बढोत्तरी होगी।

जूना अखाड़ा के अन्र्तराष्ट्रीय संरक्षक महंत स्वामी हरि गिरि महाराज ने कहा कि मन्दिर की उचाई बढ़ाने की अनुमति मिलने पर मुख्यमंत्री एवं शहरी विकासमंत्री मदन कौशिक को साधुवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एवं शहरी विकासमंत्री विकासपुरूष है। इनके नेतृत्व में उत्तराखण्ड निश्चित ही विकास की नई गाथा लिखेगा। हवन कुण्ड में आहूतियाॅ डालने के दौरान पूर्व सभापति श्महंत सोहन गिरी,सचिव महंत महेशपुरी,सचिव महत शैलेन्द्र गिरी,कोठारी लाल भारती,कारोबारी महंत महादेवानंद गिरी,थानापति राजेन्द्र गिरी,थानापति रणधीर गिरी,थानापति सहजानंद सरस्वती,पुजारी,थानापति परमांनद गिरी सहित अखाडे के सभी साधु-संत शामिल रहे।