सफरनामा : रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind)

उत्तर प्रदेश के कानपूर देहात के एक छोटी सी तहसील डेरापुर के एक छोटे से गाँव परौंख में जन्मे रामनाथ कोविन्द ने इस देश के 14 वे राष्ट्रपति रूप में 25 जुलाई 2017 को शपथ ली | अत्यंत साधारण दलित परिवार से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचे रामनाथ कोविंद ने सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़ते हुए इस शिखर तक का सफर तय किया है। तीन भाइयों में सबसे छोटे रामनाथ कोविंद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर विकासखंड के ग्राम खानपुर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में हुई। उन्होंने डीएवी कॉलेज से बीकॉम तथा डीएवी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की।

कोविन्द का सम्बन्ध कोरी (कोली) जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति, गुजरात में अन्य पिछड़ा वर्ग एवम् उड़ीसा में अनुसूचित जनजाति आती है। वकालत की उपाधि लेने के पश्चात उन्होने दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील रहे। 8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर उनकी नियुक्ति हुई। उन्होनें संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा भी तीसरे प्रयास में ही पास कर ली थी।

वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गये। वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2000 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे। वह ‘भाजपा दलित मोर्चा’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और ‘अखिल भारतीय कोली समाज’ के अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे।

जब राज्यपाल पद पर उनकी नियुक्ति की गई थी तब भी यह कहा गया था कि भाजपा ने उनके सहयोगी दलों से समुचित विचार-विमर्श नहीं किया था। राज्यपाल के पद पर रहते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों में नाकाबिल लोगों के चयन और वित्तीय कुप्रबंधन तथा अयोग्य शिक्षकों की प्रोन्नति में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई।

NDA गठबंधन द्वारा 19 जून 2017 को भारत के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित किये गए। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की, अमित शाह ने कहा कि रामनाथ कोविंद दलित समाज से उठकर आये हैं और उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए बहुत काम किया है, वे पेशे से एक वकील हैं और उन्हें संविधान का अच्छा ज्ञान भी है इसलिए वे एक अच्छे राष्ट्रपति सिद्ध होंगे और आगे भी मानवता के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे। 20 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति के निर्वाचन का परिणाम घोषित हुआ जिसमें कोविंद ने UPA की प्रत्याशी मीरा कुमार को लगभग 3 लाख 34 हजार वोटों के अंतर से हराया।

सरल स्वभाव के कोविंद जी को लेकर आजकल एक विवाद चल रहा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बीते 15 मई को राजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर गए थे. सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाई गई थी कि राष्ट्रपति को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया था, जिसके चलते उन्होंने मंदिर की सीढ़ियों पर पूजा की थी

मालूम हो कि रामनाथ कोविंद दलित समाज से हैं और जैसा कहा जाता है भारत में कई मंदिरों में आज भी दलितों का प्रवेश वर्जित है |

हालांकि इस मामले में ज़िला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की पत्नी को मंदिर की सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होने की वजह बाहर पूजा की गई थी.

जातीय भेदभाव के चलते मंदिर में प्रवेश न देने का मामला गलत साबित हुआ था क्योंकि राष्ट्रपति की बेटी मंदिर के अंदर दर्शन करने गई थीं |

मंदिर के पुजारी ने जातीय भेदभाव का आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि जब उन्हें पता चला कि राष्ट्रपति आ रहे हैं तब उन्होंने मंदिर के गर्भ गृह में पूजा की व्यवस्था की थी, लेकिन राष्ट्रपति की पत्नी को सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत थी, इसलिए बाहर व्यवस्था कराई गई थी|