रिवर्स पलायन : पौड़ी के धुमाकोट, गुजडू पट्टी में बंजर खेतों मे आधुनिक तकनीक से आर्गेनिक खेती, अनिल शर्मा उगा रहे दुनिया के सबसे उन्नत बीजों की सब्जियाँ

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पलायन के इस दौर मे उत्तराखंड के पहाड़ खाली हो रहे हैं खेत बंजर हो रहे हैं, जंगल गांव तक बढ़ गए हैं. पलायन का सबसे बड़ा कारण रोजगार माना जाता है परन्तु इस बीच कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस समस्या से लड़ रहे हैं वह भी ज़मीन पर कार्य करके एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं. ऐसा ही एक नाम है अनिल शर्मा का जिन्होंने गुजडू जैविक के माध्यम से अपने भाई के साथ मिलकर बंजर खेतो मे सोना उगा दिया.

आज उनके खेतों की सब्जियाँ हाथों हाथ बिक रही हैं. अनिल शर्मा बताते हैं कि शुरुआत मे उनके सामने कई समस्याएं आयी पानी, हल, बिजली, अन्य संसाधन सबसे पहले खेतों के पास पानी पहुंचाया गया, सिर्फ हल लगाने मे ही हज़ारों रूपये खर्चा हो गया, फिर आधुनिक मशीनों से खुदाई और हल लगाया गया.

पहले वर्ष सिर्फ मक्का की खेती की गयी. अगले वर्ष अनिल ने दुनिया के उन्नत किस्म के बीजों की पहचान कराई जिसमे से कुछ इंडो अमेरिकन जैसे बीजों की डीलरशिप स्वयं अनिल शर्मा के पास है. यूरोप मे प्रसिद्ध खीरा भी गुजडू ऑर्गनिक उगा रहा है. शिमला मिर्च, प्याज़, टमाटर, केसर की खेती लहलहारही है.

“अनिल शर्मा का कहना है कि उनका उद्देश्य युवाओं को एक मॉडल प्रस्तुत करना है जिसमे वह कम इन्वेस्टमेंट से अपने घर मे अपने लिए आजीविका जुटा सकता है”

पहाड़ों मे जिन खेतों मे हमारे पूर्वजों का पसीना बहा हो वह बंजर ना रहे. इस कार्य में अपार संभावनाएं हैं, अभी गुजडू आर्गेनिक द्वारा उगाई सब्जियां स्थानीय बाजारों में ही हाथों हाथ बिक जाती हैं। अगर आपको अपने गांव का स्वाद कही शहर में मिल जाये तो आप क्यों नहीं लेना चाहोगे, गुजरू आर्गेनिक द्वारा इसके लिए आगे पहल की जाएगी, गुजरू आर्गेनिक ने एक वेबसाइट (gujruorganic.com) भी बनायीं है जिसमे खेती के तरीकों को और उन्नत किस्मों के बीजों के बारे में बताया जायेगा। इजरायल जैसा छोटा देश ऑर्गेनिक खेती को अत्यधिक आधुनिक तरीके से करके फलों सब्जियों को एक्सपोर्ट कर विश्व भर के लिए एक प्रेरणा बना हुआ है। उत्तराखंड में इसकी अपार संभावनाएं हैं जिसको सही दिशा देने की आवश्यकता है।

सामाजिक कार्यों से सरोकार रखने वाले अनिल शर्मा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रोजेक्ट किये हैं। दंतेवाड़ा सुकमा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में राज्य सरकार के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवाएं दी हैं। जमीन पर कार्य करते हुए स्वयं ऐसे स्थानों में रहे हैं। वर्तमान में अनिल शर्मा उत्तराखंड में 108 इमरजेंसी सर्विस के ज़ीऍम प्रोजेक्ट भी हैं।