आवासीय विभाग भी वसूल रहा कोरोना टैक्स, भवनों के शमन शुल्क में बेहताशा वृद्धि

(अरुण डिमरी)

देहरादून, लगातार प्राधिकरण के जरिये कमाई के रास्ते ढूंढ रहा आवासीय विभाग अब मानचित्रों की स्वीकृति के लिए मोटी फीस वसूल रहा है और इसके लिए उसने सामान शुल्क में बेहताशा बृद्धि कर दी है जो आम आदमी के बूते से बाहर है। आवास अनुभाग द्वारा 2019 में बिना नक्शे के बने ऐसे भवन जो प्राधिकरण की स्थापना से पूर्व या 84 में प्राधिकरण के गठन के वक़्त बने थे ऐसे भवनों के लिए तय शमन शुल्क जमीन से पॉव खिसकने जैसा है। पूर्व में कंपाउंडिंग रेट के इतर अब आवासीय में अग्र भाग पर सर्किल रेट 125 प्रतिशत,पिछले भाग में 125 प्रतिशत, साइट बेक पर 125 प्रतिशत तथा अनुमन्य रेट 10 प्रतिशत किया है।वही कमर्शियल में अग्र भाग में 300 प्रतिशत, पिछले भाग पर 200 प्रतिशत, साईट बेक पर 200 प्रतिशत के कठोर नियम बनाये है। ऐसे ही विकास शुल्क भी वसूल किया जा रहा है। यह देखने में भी आ रहा है की जिन लोगों ने नक्शे अप्लाई किये अब वह शुल्क देखकर दबे पॉव वापस लौट आये है। आम लोगों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है की भारी भरकम शुल्क बृद्धि एमडीडीए के द्वारा की गयी या कैबिनेट की बैठक में तय किया गया अथवा शासन स्तर पर,लेकिन रेट किसी के गले नही उतर रहे है।जो लोग पूर्व निर्धारित रेट पर ही नक्शे की फीस जमा करने में कतरा रहे थे वह अब इसे कोरोना टेक्स बता रहे है। ऐसे में लोगो के सामने शमन शुल्क को लेकर एमडीडीए की दहलीज पर झांकना कोरोना से भयावह हो गया है।बहरहाल लोग अब वेट एंड वाच की मुद्रा में है।