नवीनीकरण ऊर्जा विकास कर्ताओं को आसानी से मिलेगा ऋणः सिंह

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नईदिल्ली ,। केन्द्रीय विद्युत और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर के सिंह ने आज नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) से संबंधित विभिन्न मुद्दों की समीक्षा के लिए बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में उनके मंत्रालय के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी तथा आर्थिक मामलों के विभाग, व्यय विभाग, वित्तीय सेवाएं विभाग, राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सार्वजनिक/निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण सीमा हटाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के साथ अनुवर्ती कार्रवाई करेगा। यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नवीकरण ऊर्जा परियोजना के लिए अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे नवीकरण ऊर्जा विकासकर्ताओं को आसानी से ऋण मिलेगा।

इस बैठक में आर के सिंह ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से नवीकरण ऊर्जा को विद्युत क्षेत्र से अलग क्षेत्र में श्रेणीबद्ध करने के लिए कहा ताकि नवीकरण ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध हो। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए मौजूदा टैरिफ दरें व्यवहार्य हैं क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की रख-रखाव और परिचालन लागत बहुत कम है। उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ-साथ आरई प्रौद्योगिकी लागत कम हो रही है जबकि आरई उपकरणों की दक्षता में दिन-प्रतिदिन सुधार हो रहा है इसलिए टैरिफ की दरें कम होना सामान्य बात है। उन्होंने बैंकों से आरई क्षेत्र को ऋण देने के लिए आगे आने के लिए कहा।

आरई परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में देर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि एसईसीआई भूमि के लिए राज्य सरकारों के साथ अनुबंध करेगा। क्योंकि भूमि लीज पर होगी इसलिए भूमि के लिए भुगतान नहीं करना पड़ेगा। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सफल बोलीदाताओं के लिए पूर्व निर्धारित ऋण का प्रस्ताव करने के लिए एसईसीआई से अनुबंध करने के लिए कहा। आरई उपकरणों/घटकों पर जीएसटी मुद्दों के बारे में विचार-विमर्श किया गया और राजस्व विभाग से जीएसटी परिषद के सामने उचित प्रस्ताव रखने का अनुरोध किया। बैठक के दौरान बदले हुए ड्यूटी ढांचे के मुद्दे पर भी विचार विमर्श किया गया। आर के सिंह ने कहा कि देश में आरई क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए हर संभव उपाय किए जाने की जरूरत है। इनमें ड्यूटी ढांचा और पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराने की योजना में सुधार करना भी शामिल है। घरों में सौर ऊर्जा से खाना पकाने को बढ़ावा देने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू करने के बारे में भी चर्चा हुई।