राफेल (Multi-Role) के स्वागत लिए तैयार अंबाला

मोस्ट अवेटेड सुपरसोनिक लड़ाकू विमान राफेल अगले साल अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से उड़ान भरने लगेगा। इस संबंध में बुनियादी ढांचे के लिए पहले चरण में रखरखाव और अपग्रेडेशन का काम आरंभ कर दिया गया है। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर 18 और पश्चिम बंगाल के हासीयारा में भी 18 लड़ाकू विमान उड़ान भर सकेंगे।

सूत्र बताते हैं कि राफेल बेड़े के लिए वर्तमान बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल तो होगा ही, उसे विस्तार भी दिया जाएगा। कम से कम 14 नए शेल्टर, हैंगरं, संचालन स्थल, एक डी ब्रीफिंग कक्ष व सिमुलेटर प्रशिक्षण का निर्माण जल्द शुरू हो जाएगा। इसे अपग्रेड किया जा रहा है। फ्रांस की टीम अंबाला एयरफोर्स स्टेशन की प्राथमिक जांच कर चुकी है।

अंबाला एयरबेस रणनीतिक लिहाज से काफी अहम है। वर्ष 1919 में स्थापित एयरफोर्स स्टेशन पाकिस्तानी सीमा से करीब 220 किलोमीटर दूर है। यहां अभी दो स्क्वाड्रन तैनात हैं। पहला जगुआर कॉम्बैट और दूसरी मिग-21 बाइसन। मिग-21 कुछ ही वर्षों में बेड़े से बाहर हो जाएंगे। ऐसे में राफेल महत्वपूर्ण हो जाता है। इसकी तैनाती से पाकिस्तान पर भारत की रणनीतिक बढ़त रहेगी।

फ्रांस और भारत के बीच समझौते के मुताबिक भारत को 36 राफेल विमान दिए जाने हैं। इनमें 18 अंबाला और 18 हासीमारा एयरबेस पर रखे जाएंगे। पश्चिम बंगाल में स्थित हासीयारा एयरबेस चीन और भूटान सीमा के करीब है। दो इंजनों वाले इस लड़ाकू विमान में दो पायलट बैठ सकते हैं। ऊंचे इलाकों में लडऩे में दक्ष यह विमान एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है।

इस विमान के भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत वर्ष 2019 में दस गुना बढ़ जाएगी। फ्रांस से आने वाले 36 राफेल एयरक्राफ्ट को लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में सन 2016 में ही फ्रांस और भारत के बीच डील हो चुकी है। फांस से आने वाले इजरायल टेक्नोलॉजी के 36 राफेल में से 18 एयरक्राफ्ट हसिमारा एयर स्टेशन (पश्चिम बंगाल) और 18 देश के सबसे पुराने अंबाला छावनी स्थित एयरफोर्स स्टेशन में रखे जाएंगे। अंबाला एयरफोर्स को इतने ताकतवर एयरक्राफ्ट पहली बार मिल रहे हैं। अंबाला को चुने जाने का मुख्य कारण पाकिस्तान और चीन के नजदीक होना है।

राफेल को सुपर सोनिक एयरक्राफ्ट कहा जाता है। यह हवा से जमीन पर करीब 150 किलोमीटर दूर दुश्मन देश पर प्रहार कर सकता है। इसमें थाले आरबीई-2 रडार, थाले स्पेक्ट्रा वारफेयर सिस्टम, ऑप्ट्रॉनिक सेक्योर फ्रंटल इंफ्रा-रेड सर्च और ट्रैक सिस्टम भी लगा होता है जो सामान्य एयरक्राफ्ट में नहीं होते है। दुश्मन देश पर परमाणु बम गिराने में भी राफेल का नाम सबसे पहले आता है, क्योंकि इसकी स्पीड मिग और जगुआर से भी कहीं अधिक है।

अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में इन राफेल एयरक्राफ्ट को खड़ा करने के लिए शेल्टर बनाने का काम शुरू हो गया है। सितंबर 2018 में शेल्टर का काम पूरा करके इसकी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को दी जानी है। देश में आने वाले 18 एयरक्राफ्ट को मॉडीफाई करने का काम अंबाला छावनी एयरफोर्स स्टेशन में ही किया जाएगा।

इसमें नये दौर की दृश्य से ओझल होने में सक्षम ‘मिटिअरÓ मिसाइल और इस्राइली प्रणाली भी शामिल की गई है। राफेल एयरक्राफ्ट जिस भी देश की सीमा में जाएगा वहां करीब 100 मीटर के दायरे में उनके रडार को जाम कर देगा। मतलब दुश्मन देश को हमारे देश के इस राफेल एयरक्राफ्ट की लोकेशन ही नहीं मिलेगी जिससे कि उसे दुश्मन देश पर वार करने में आसानी होगी।

राफेल विमान की लंबाई 15.27 मीटर है और इसमें दो पायलट बैठ सकते हैं। राफेल ऊंचे इलाकों में लडऩे में माहिर है। यह एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसकी अधिकतम भार उठाकर उडऩे की क्षमता 24500 किलोग्राम है। राफेल की अधिकतम रफ्तार 2200 से 2500 तक किमी प्रतिघंटा है। इसमें 1.30 एमएम की एक गन लगी होती है जो एक बार में 125 राउंड गोलियां निकाल सकती है।

कुछ और प्रमुख बातें –

300 किमी की रेंज से हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम
9.3 टन वजन के साथ 1650 किलोमीटर तक उड़ान भरने की क्षमता
14 हार्ड प्वाइंट के जरिये भारी हथियार भी गिराने की क्षमता
घातक एमबीडीए एमआइसीए, एमबीडीए मेटेओर, एमबीडीए अपाचे, स्टोर्म शैडो एससीएएलपी मिसाइलों से लैस
थाले आरबीई-2 रडार और थाले स्पेक्ट्रा वारफेयर सिस्टम के साथ ऑप्ट्रॉनिक सेक्योर फ्रंटल इंफ्रा-रेड सर्च और ट्रैक सिस्टम से लैस