हिंसा से उपजे सवाल, सी.ए.ए. के विरोध में क्यों बरपा है हंगामा

(डॉ. सुभाष गुप्ता)
देहरादून, । नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) के विरोध की आंच में देश सुलग रहा है। विरोध के बीच उ. प्र. समेत देश के कई हिस्सों में हिंसा और मौतों के सिलसिले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षाविदों ने खासतौर से आगे बढ़कर छात्रों से अफवाहों से सावधान रहने और हिंसा से दूर रहने का आह्वान किया है।
नागरिकता कानून (सी.ए.ए.) के विरोध में आगजनी की घटनाओं से देश के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विचलित हो उठे हैं। उन्होंने देश की सम्पत्ति और गरीब की झोपड़ी न जलाने की अपील करते हुए यहां तक कहा है कि उनका पुतला जलाना है, तो जलाओ, लेकिन देश की सम्पत्ति मत जलाओ।
गृह मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि इस कानून से देश का कोई नागरिक प्रभावित नहीं होगा। नागरिकों को संविधान के जरिये जो मौलिक अधिकार प्रदान किये गए हैं, उन्हें छीना नहीं जा सकता। गौरतलब है कि देश का सर्वोच्च न्यायालय संविधानिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में हर मौके पर अपनी सजगता और निर्भीकता साबित कर चुका है। ऐसे में ये एक बड़ा सवाल है कि देश के नागरिकों पर जिस कानून का कोई असर ही नहीं पड़ने वाला है, उसे लेकर इतनी हिंसा क्यों हो रही है? क्या उन लोगों के समर्थन में अपने देश की सम्पत्ति फूंकी जा रही है, जो यहां के नागरिक ही नहीं हैं, क्या महज इंसानियत के नाते कोई इस हद तक जा सकता है, या हिंसा से किसी को लाभ होने वाला है, हिंसा करने वाले लोग क्या वाकई इस मुद्दे की बारीकियों को समझते भी हैं या उन्हें टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है… ऐसे सवालों के जवाब भी खोजे जाने चाहिएं।
न्यूज चैनल आज तक का सर्वे और ज्यादा चौंकाने वाले तथ्यों को जाहिर करता है। इस सर्वे के मुताबिक देश के 62 प्रतिशत लोग सी.ए.ए. के समर्थन में हैं। इस सर्वे में यह भी बताया गया है कि देश में 35 प्रतिशत मुस्लिम भी इस कानून का समर्थन करते हैं। यही नहीं, देश के 32.3 फीसदी हिंदु इस कानून के विरोध में हैं। असम में स्थिति अलग है।
देश का संविधान हर नागरिक को वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। कोई भी कानून इसे छीन नहीं सकता। फिर शांतिपूर्वक अपना विरोध दर्ज कराने के बजाय हजारों लोग हिंसा का सहारा क्यों ले रहे हैं, यह सवाल अफवाहें फैलाने और कुछ निहित स्वार्थी तत्वों की सक्रियता और देश को कमजोर करने की साजिश की ओर इशारा करता है।
इस कानून से कोई सहमत हो या न हो, ये उसका अपनी राय हो सकती है, लेकिन किसी को कानून तोड़ने और हिंसा करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्पत्ति जलाने वालों से उसकी कीमत वसूलकर भरपाई करने की व्यवस्था करके एक स्वागत योग्य कदम उठाया है। इससे देश भर में संदेश गया है कि सरकारी या दूसरों की सम्पत्ति किसी के रहमोकरम की मोहताज नहीं है कि जब जी चाह उसे आग के हवाले कर दिया। विरोध चाहे किसी भी मुद्दे को लेकर हो, यह व्यवस्था सब पर लागू की जाए, तो एक बड़े सकारात्मक सुधार की उम्मीद की जा सकती है।