जानकारी : पुरानी कार (Used Car) खरीदने से पहले ध्यान रखें कुछ बातें

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एक आम भारतीय नयी कार आसानी से नहीं खरीद पाता लेकिन उसके लिए भारतीय बाजार में सेकंड़ हैंड कार खरीदने के अलावा कोई option नहीं होता ऐसे में डीलर से Old/ Used कार खरीदते वक्त सबसे बड़ा जोखिम एक आम आदमी इतनी आसानी से नहीं ले पता ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें कई बार शिकायत मिलती है कि कार के ओडोमीटर (मीटर रीडिंग/माइलेज) के साथ छेड़छाड़ की गई है। बता दें ओडोमीटर में दिखने वाले किलोमीटर को कार बेचने से पहले बदल दिया जाता था ताकि उसे महंगी कीमत में बेचा जा सके। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें लोगों ने केवल 40 हजार किलोमीटर चली सेकंड़ हैंड कार खरीदी होती है लेकिन कुछ दिनों बाद पता चलता है कि वह इससे कई ज्यादा चल चुकी है। इसके बारे में ग्राहकों को कार में लगे सर्विस स्टिकर या ऑथराइज्ड सर्विस स्टेशन से पता चलता है, जो कार का रिकॉर्ड रखते हैं। आइये आपको कुछ आसान से टिप्स से बताते है जब आप पुरानी कार खरीदने जाये

किस तरह होती है कार में छेड़छाड़?

आजकल सभी कारें डिजिटल ओडोमीटर के साथ आती हैं जिसमें सर्किट बोर्ड के साथ चिप लगी रहती है। इसी चिप में ओडोमीटर की रीडिंग स्टोर रहती है। ऐसे में मैकेनिक या तो बोर्ड में लगी चिप की जगह अपनी रीडिंग चिप लगा देते हैं या फिर OBD2 रीडर्स की मदद से ऑरिजनल चिप में रीडिंग को बदल देते हैं। बता दें OBD2 रीडर्स को कार में लगे OBD2 पोर्ट से कनेक्ट करके ऐसा किया जाता है।

किस तरह करें इसकी पहचान

इसमें सबसे मुश्किल तो यह है कि इस फ्रॉड से बचने का कोई सिंगल तरीका नहीं है। इसे आप अपनी समझ या फिर किसी अनुभवी मैकेनिक की मदद से ढूंढ सकते हैं। इसके बावजूद भी कुछ ऐसी चीजें हैं जिससे आपको पता चल सकता है कि ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ हुई है या नहीं। या फिर आप किसी ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से कार की सर्विस और मैंटेनेंस हिस्ट्री को ढूंढने की कोशिश करें और मौजूदा रीडिंग की तुलना आखिरी सर्विस वाले किलोमीटर से करें। इसके अलावा अगर की माइलेज मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में बेहद कम है तो आप विंडशिल्ड या डोर आदि पर लगे स्टिकर से पता कर सकते हैं कि कार की सर्विस कितने किलोमीटर चलने के बाद हुई है।

आजकल ऑनलाइन कार खरीदने और बेचने का ट्रेंड हैं, अगर आप ऑनलाइन कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपको यहां कई ऑप्शन मिल जायेंगे। अपने बजट के हिसाब से गाड़ी का चुनाव कर सकते हैं सब कुछ जानने के बाद आप दिए गये नंबर्स पर बात करके आगे की प्लानिंग आकर सकते हैं।
अगर अपने किसी वेबसाइट पर पुरानी कार पसंद कर ली है तो उसी वक़्त उसे खरीदने से पहले उसकी टेस्ट ड्राइव जरूर करें ताकि आपको कार का सही अंदाजा लग सके। यह भी देखें की कही कार में कोई रिपेयर का काम तो नहीं हुआ।

ऑनलाइन कार खरीदते समय यह भी देखें कि जो मॉडल आप फाइनल कर रहे हैं क्या वह बंद तो नहीं हुआ, या बंद होने वाला हो, अक्सर ऐसे मॉडल्स की कीमत कम रहती है मार्किट में। दूसरी बात, जो भी मॉडल बंद हो जाते हैं उनके पार्ट्स मार्किट में आसानी से नहीं मिल पाते जिसकी वजह से कई बार दिक्कत हो जाती है सर्विस के दौरान जो बाद में आपको परेशनी का सबब बन सकती है |

गाड़ी के सभी डॉक्युमेंट्स पर ध्यान रहे –

1 – कम्पलीट डॉक्यूमेंट चैक करना है |
2- इन्शुरन्स के डॉक्यूमेंट चैक है |
3 – गाड़ी का प्रीमियम सही समय पर दिया गया है या नहीं |
4 – इन्सुरेंस और गाड़ी दोनों के कागज़ात आपके नाम से ट्रान्सफर हो सकते है कि नहीं |
5 – रोड टैक्स खूब तक का भरा है |
6 – अगर गाड़ी की ओरिजिनल इनवॉइस हो तो ज्यादा बहतर होगा
7 – अभी तक गाड़ी कितने हाथों से गुजरी (sale/Purchase) हुई है उसकी हिस्ट्री पते और फोन नंबर मिल जाये तो उसमे कोई शर्म न करें |

वैसे तो जब आपकी जरूरत है तभी आपको कार लेनी चाइये लेकिन अगर आप सही तरीके से प्लान करके का कार खरीदते हैं तो आपको काफी बचत हो सकती है, जैसे कार खरीदने का सही समय कौन सा है ? दोस्तों साल खत्म होने से पहले यदि पुरानी कार खरीदते हैं तो आपको अच्छी डील मिल सकती है। क्योकिं साल खत्म होने के बाद मॉडल पुराना हो जाता है और री-सेल वैल्यू भी गिरती है।